गुरुवार, 17 अप्रैल, 2008 को 05:47 GMT तक के समाचार
वैज्ञानिकों की मानें तो अब वो दिन दूर नहीं जब चाँद पर भी फूल खिलेंगे और इससे चांद पर इंसानों को बसाने की कल्पना साकार हो सकती है.
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वो घड़ी नज़दीक़ आ गई है जब चंद्रमा पर पौधे उग सकेंगे.
ईएसए के वैज्ञानिकों की टीम ने चांद जैसी पथरीली ज़मीन पर गेंदा का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है.
ख़ास बात ये है कि इन पौधों को जीवित रहने के लिए पानी की ज़रूरत भी नहीं होगी जो कि किसी भी पौधे के ज़िंदा रहने का आधार होता है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज के ज़रिए चंद्रमा पर इंसानों के बसने की कल्पना को साकार होने की उम्मीद बढ़ गई है.
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के इस शोध को विएना में हुई यूरोपीय जियोसाइंसेस यूनियन(ईजीयू) की एक बैठक में पेश किया गया.
ईजीयू नाम की ये संस्था धरती और उसके पड़ोसी ग्रहों पर होने वाले मौसमों के बदलाव पर खोज करती है.
यूरोपीय स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक बर्नार्ड फ़ोइंग मानते हैं, "चंद्रमा पर पौधों के उगने की खोज के ज़रिए इस बात को समझने में मदद मिलेगी कि धरती से दूर जीवन किस तरह अनुकूल होता है."
हालाँकि, अब तक वैज्ञानिक स्पेस स्टेशन पर एक खास तरह से तैयार की गई किट में पौधों के बीज और खाद रखकर उसे कृत्रिम तरीके से पानी देकर पौधों को उगाया करते हैं.
लेकिन यूरोपीय स्पेस एजेंसी के इस ताज़ा शोध के बाद वैज्ञानिकों को अब धरती से खाद जैसी दूसरी चीज़ें नहीं ले जानी होंगी.
क्या है शोध ?
कीव में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस के दो वैज्ञानिकों नताशा कोज़ीरोवस्का और इरयना ज़ाएट्ज़ ने मारीगोल्ड के पौधों को 'एनोरथोसाइट' की चट्टान पर लगाया.
'एनोरथोसाइट' धरती पर पाई जाने वाली ठीक उसी तरह की चट्टान है जैसी चाँद पर पाई जाती है.
शुद्ध 'एनोरथोसाइट' की चट्टान पर तो मारीगोल्ड का पौधा नहीं बढ़ पाया. लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इस चट्टान पर कुछ खास किस्म के बेक्टीरिया डाले तो पौधे में बढ़त दर्ज की गई.
वैज्ञानिकों के अनुसार इस बेक्टीरिया ने एनोरथोसाइट की चट्टान में पोटेशियम पैदा कर दिया जो कि पौधों की बढ़त के लिए ज़रूरी होता है.
चाँद पर शोध
चाँद हमेशा से ही इंसानों के लिए सवालों का केंद्र रहा है. पिछले कई दशकों से चंद्रमा के बारे में नई-नई जानकारियाँ जुटाई गई हैं.
पिछले दस सालों में चंद्रमा पर कई खोजें की गई हैं.
यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने 2006 में 'स्मार्ट-1' नाम का प्रोब चंद्रमा पर भेजा था.
इसी तरह पिछले साल ही चंद्रमा के बारे में कुछ और जानकारी जुटाने के लिए चीन ने 'चांग-1' और जापान ने 'कागुया' नाम के 'ऑर्बिटर्स' भेजे थे.
भारत भी अगले कुछ ही महीनों में 'चंद्रयान-1' नाम का ऑर्बिटर भेजने वाला है.
2020 तक अमरीका एक बार फिर चाँद की सतह पर इंसानी कदम उतारने का सपना रखता है.
हालाँकि, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने चाँद को लेकर अपना कोई नया मिशन नहीं तैयार किया है.
लेकिन विएना में हुई बैठक के बाद वैज्ञानिकों में राय बनी है कि चाँद पर मारीगोल्ड, ट्यूलिप या फिर बंद-गोभी लगाना यूरोपीय स्पेस एजेंसी के अगले मिशन 'मून नेक्स्ट' का हिस्सा हो सकता है.
डॉक्टर बर्नार्ड फ़ोइंग कहते हैं कि इस खोज के बाद हो सकता है यूरोपीय या दूसरे देश चाँद पर अपने मिशन के दौरान अपने देशों के झंडे लगाने की बजाए वहाँ पौधों की बीज लगाना पसंद करें.