|
टैंक के उपयोग को पूरे हुए 90 साल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टैंक कहने भर से एक ऐसे दानवीय हथियार बंद वाहनों की तस्वीर उभरती है जो धूल उड़ाती और आग उगलती अपने शिकार की तलाश में बेधड़क चल रहे हों. जिन्होंने पुरानी तस्वीरें देखी हैं, उन्हें 1940 की गर्मियों में फ़्रांस की सड़कों पर टैंकों की कतारें याद आ सकती हैं. आख़िरकार टैंकों ने द्वितीय विश्व युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका जो निभाई थी. हालांकि लियानार्डो दा विंची ने एक ऐसे वाहन की कल्पना की थी जो युद्धक्षेत्र में हथियार बंद वाहन की तरह उपयोग में लाया जा सके और सुपरिचित लेखक एचजी वेल्स ने 1904 में भाप से चलने वाले एक लौह वाहन का ज़िक्र किया था. लेकिन सच यह है कि टैंक की उम्र अभी एक सदी से भी कम है और टैंक के उपयोग को 15 सितंबर को 90 वर्ष पूरे हो गए. इनका उपयोग सबसे पहले जर्मन फ़ौजों ने सोम के युद्ध में किया था. ये और बात है कि उस समय न केवल वे दिखते अगल थे और उनका उपयोग भी अलग था. इसका अविष्कार कई लोगों ने मिलकर किया था और उस समय किया था जब युद्ध क्षेत्र में कंटीले तार और खंदकों को बड़ी बाधा माना जाता था. सबसे पहले एक किसान ऐसे हथियारबंद वाहन के डिज़ाइन के साथ सामने आया था जो खंदकों को लाँध जाता था. लेकिन इसे सेना ने खारिज कर दिया था. पानी का टैंक? बाद में लेफ़्टिनेंट कर्नल अर्नेस्ट स्विंटन ने ऐसे ही एक अमरीकी डिज़ाइन के आधार पर ऐसा ही एक वाहन बनाया था.
विंस्टन चर्चिल को नए सैन्य उपकरणों का बड़ा शौक था और उनके नेतृत्व में बनी एक समिति ने 1915 में एक मोबाइल मशीनगन डेस्ट्रॉयर (चलित मशीनगन नाशक) बनाया था. इस समिति में सैनिकों के अलावा राजनीतिज्ञ और निर्माता शामिल थे. इस वाहन का असली उपयोग जर्मनों से छिपाने के लिए इसका नाम रखा गया, 'मोबाइल वाटर टैंक फॉर मैसापोटामिया'. दरअसल में दिखते भी पानी के टैंक जैसे थे. लोहे की मोटी चादरों से बने और बड़े रिवेट्स से जोड़े गए. पहले पहल टैंक दो तरह के थे. एक 'मेल' और दूसरा 'फ़ीमेल'. इनमें 150 हॉर्स पॉवर का डैमलर इंजिन लगा हुआ था. इनको चलाने के लिए सैनिकों को विशेष रुप से प्रशिक्षित किया गया था. 15 सितंबर 1916 में पहली बार ब्रितानी सेना ने इसका उपयोग किया. जादुई हथियार पहली खेप में 49 टैंक भेजे गए थे. लेकिन इनमें से 31 तो हमला शुरु होने से पहले ही ख़राब हो गए. 18 टैंक तीन किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से आगे बढ़े. छह टैंक ज़मीन के गड्ढों में फँस गए, आठ गोलाबारी के निशाने में आ गए और दो में आग लग गई. लेकिन दो टैंक आगे बढ़ निकले. एक ने जर्मन सेना के एक गढ़ पर कब्ज़ा कर लिया और दूसरा जर्मनी की सीमा के भीतर जा घुसा.
एक ब्रितानी विमान ने ख़बर दी, "एक टैंक फ़्लेर्स की सड़कों पर बढ़ता चला जा रहा है और उसके पीछे ब्रितानी सैनिक ख़ुशी मनाते चले जा रहे हैं." अख़बारों ने ख़बर दी कि यह एक अद्भुत हथियार है और जनता इसको देखने के लिए अधीर हो गई. लेकिन सैन्य कार्यालय ने इसकी तस्वीर देने से मना कर दिया. आख़िर एक महीने बाद, 22 नवंबर को डेली मिरर ने इसकी तस्वीर प्रकाशित की. उस समय अख़बार ने इस तस्वीर के लिए एक हज़ार पाउँड खर्च किए थे. बाद में फ़्रांस ने भी टैंक विकसित कर लिए और अप्रैल 1918 में पहली बार टैंकों के बीच भिड़ंत हुई. 1939-41 में जर्मनी ने अपने टैंकों की बदौलत ही यूरोप के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था. 1944 तक तो अनेक विशेषताओं वाले टैंकों का निर्माण होने लगा था. तब से अब तक टैंक ने एक लंबी यात्रा तय कर ली है. इसराइल और इराक़ में टैंकों को जिस तरह से टैंकरोधी हथियारों का निशाना बनाया गया है उसके बाद पश्चिमी देश टैंक के भविष्य पर भी विचार करने लगे हैं. 2003 के बाद भारी भरकम टैंकों की जगह अपेक्षाकृत हल्की बख़्तरबंद गाड़ियों की संख्या बढ़ी है. लेकिन अभी भी अफ़ग़ानिस्तान से लेकर इराक़ तक कई जगह टैंक एक शक्तिशाली हथियार बना हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें जापानी सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव10 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना सैकड़ों इसराइली टैंक ग़ज़ा में घुसे30 सितंबर, 2004 | पहला पन्ना 'नॉरमैंडी की लड़ाई' की 60वीं वर्षगाँठ05 जून, 2004 | पहला पन्ना बोइंग टैंकर की ख़रीद पर पेंटागन की रोक02 दिसंबर, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||