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चाँद पर पाँव रखने की फ़िल्म गुम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चाँद पर इंसान के पैर रखने की घटना को मानवता की सबसे ऊँची छलाँग कहा जाता है लेकिन इस ऊँची छलाँग की असली तस्वीर गुम हो गई है. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के गोडार्ड स्पेस सेंटर की लाइब्रेरी से वह फ़िल्म लापता है जिसमें नील आमस्ट्रांग को चाँद पर चहलक़दमी करते दिखाया गया है. हालाँकि इस फ़िल्म की कई प्रतियाँ मौजूद हैं लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार कॉपी किए जाने से उनकी क्वालिटी काफ़ी ख़राब हो गई है जबकि ऑरिजनल फ़िल्म मिल नहीं रही है. जिन लोगों ने इस फ़िल्म को गोडार्ड स्पेस सेंटर में सुरक्षित रखा था उनमें से ज़्यादातर लोग कहीं और चले गए हैं, रिटायर हो गए हैं या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है. आपने अब तक चाँद पर नील आमस्ट्रांग के उतरने की जितनी फ़िल्में देखी हैं उनकी क्वालिटी मूल प्रति के मुक़ाबले काफ़ी ख़राब है. असली फ़िल्म और उसकी प्रतियों में एक अहम तकनीकी अंतर भी है, चाँद पर जाने वाले अभियान दल ने बहुत अच्छी क्वालिटी की तस्वीरें भेजी थीं, जिसमें एक सेकेंड में दस फ्रेम दिखाई देते हैं लेकिन यह फिल्म टेलीविज़न प्रसारण के उपयुक्त नहीं थी, इस वजह से उसे 60 फ्रेम प्रति सेकेंड के फॉर्मेट में बदल दिया गया. ऐसा करने की वजह से मूल फ़िल्म में दिखने वाली कई बारीक़ चीज़ें दिखनी बंद हो गईं. नासा की चंद्र यात्रा की तस्वीरों को सहेजने की ज़िम्मेदारी संभाल चुके स्टेन लेबर अब अस्सी साल के हो चुके हैं और वे कहते हैं कि मूल प्रति की क्वालिटी बहुत बेहतर है इसलिए उसे खोजना बहुत ज़रूरी है. स्टेन लेबर अब लाइब्रेरी में असली टेप को ढूँढने में लगे हैं, उनका कहना है कि असली टेप को आधुनिक डिजिटल टेक्नॉलॉजी के इस्तेमाल से बेहतर बनाया जा सकता है. नासा के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि टेप न तो चुराए गए हैं और न ही यह शरारती कार्रवाई है लेकिन यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. नासा ने कहा है कि वे टेप को ढूँढने की पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन 35 वर्ष बीत जाने की वजह से यह काम आसान नहीं रह गया है. |
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