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मेंढकों से निपटने के लिए सेना की मदद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोई भी देश दुश्मनों से सामना करने के लिए सेना का सहारा लेता है लेकिन पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में मेंढकों से निपटने के लिए सेना नियुक्त करने की अपील की गई है. पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के लोग ज़हरीले केन मेंढकों से बहुत अधिक परेशान हैं और अधिकारियों ने मेंढकों से निपटने के लिए सेना भेजने की अपील की है. ये मेंढक पहली बार 1930 में ऑस्ट्रेलिया लाए गए थे केन बीटल्स कीड़ों का सफ़ाया करने के लिए. केन बीटल्स का तो सफ़ाया हो गया लेकिन अब ये मेंढक वन्यजीवन को तहस-नहस करने में लग गए हैं. एक अनुमान के मुताबिक़ इस समय ऑस्ट्रेलिया में ऐसे मेंढकों की संख्या एक करोड़ से अधिक होगी. ये मेंढक ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी हिस्सों में भी फैल गए हैं और इसे देखते हुए पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के लोग काफ़ी डरे हुए हैं. अधिकारी चाहते हैं कि सेना की मदद से इन मेंढकों को रोका जाए और इस संबंध में स्थानीय सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है ताकि इन्हें रोकने में सेना का इस्तेमाल किया जा सके. पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का अधिकतर हिस्सा बीहड़ है इसलिए सेना की मदद महत्वपूर्ण हो सकती है. ज़हरीले मेंढक केन मेंढक बहुत अधिक ज़हरीले होते हैं और इन मेंढकों ने ऑस्ट्रेलिया के वन्यजीवन पर बहुत बुरा असर डाला है. इनका ज़हर इतना ख़तरनाक है कि यह मगरमच्छ, सांपों और कई अन्य जानवरों को मिनटों में मार सकता है. अभी तक इन मेंढकों से निपटने की सरकार की सारी कोशिशें विफल हो चुकी हैं. किसी को नहीं पता कि इन मेंढकों से कैसे निपटा जाए. ऑस्ट्रेलिया की केंद्रीय सरकार के एक मंत्री ने तो यहाँ तक सुझाव दिया कि लोगों को अपने गोल्फ़ और क्रिकेट बल्लों के ज़रिए इन मेंढकों को मारना चाहिए. हालांकि पशुओं के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि इन मेंढकों को पकड़ कर फ़्रीज़र में रखा जाना चाहिए जब तक ये मर न जाए. |
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