बुधवार, 26 मई, 2004 को 07:20 GMT तक के समाचार
अमरीकी वैज्ञानिकों के एक दल ने शुक्र ग्रह के घने बादलों में जीवन होने की संभावना जताई है.
यह बात विज्ञान पत्रिका 'एस्ट्रोबॉयोलॉजी' के ताज़ा अंक में छपी एक रिपोर्ट में सामने आई है.
ग़ौरतलब है कि शुक्र की सतह पर जीवन के किसी संकेत की बात नहीं सोची जा सकती है क्योंकि वह तवे की तरह गर्म है.
अलबत्ता अब विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्र के बादलों में जीवाणुओं का अस्तित्व हो सकता है.
इन घने बादलों का बाहरी हिस्सा गंधक यौगिकों की एक चादर के कारण सूर्य की तेज़ किरणों से सुरक्षित रहता है.
वैज्ञानिकों ने अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा को सौंपी एक रिपोर्ट में पेशकश की है कि शुक्र के बादलों के नमूने को धरती पर लाने का प्रयास किया जाना चाहिए.
कैलीफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर एंड्रयू इंगरसोल कहते हैं, "शुक्र वास्तव में नरक जैसी जगह है. यदि आप उसके सल्फ़्यूरिक एसिड वाले बादलों को पार करते हुए उसके सतह तक पहुँच सकें तो आप पाएँगें कि वह आग की भट्टी से भी ज़्यादा गर्म है. इतना गर्म कि सीसा तक पिघल जाए. वहाँ पानी नहीं है."
लेकिन यह स्थिति हमेशा से नहीं थी.
जुड़वाँ ग्रह
वास्तव में शुक्र को कई मायने में धरती का जुड़वाँ ग्रह माना जा सकता है.
इंगरसोल ने कहा, "नवीनतम सिद्धांतों में इस पर ज़ोर दिया जाता है कि शुक्र और धरती शुरुआती दिनों में संभवत: एक जैसे रहे हों. तब शुक्र पर ख़ूब पानी रहा होगा और धरती पर ख़ूब कार्बनडॉइऑक्साइड."
बाद में इस स्थिति में बदलाव हुआ होगा जब धरती पर जल में पनपे जीवन ने कार्बनडाइऑक्साइड को चूने में बदल दिया होगा. दूसरी ओर धरती के मुक़ाबले सूर्य से ज़्यादा क़रीब होने के कारण शुक्र की सतह का पानी भाप बनकर न सिर्फ़ ग़ायब हो गया होगा, बल्कि वहाँ ग्रीनहाउस प्रभाव बनाने में भी सहायक बना होगा.
लेकिन टेक्सस विश्वविद्यालय के लुईस इरविन के अनुसार ये परिवर्तन काफ़ी लंबे अरसे में हुआ होगा और इस तरह वहाँ जीवन पनपने या पहुँचने की पूरी संभावना होगी.
वैज्ञानिकों के अनुसार एक बार कहीं पर भी जीवन शुरू हो जाए तो तमाम परिवर्तनों के बीच उनकी मौजूदगी किसी-न-किसी तरह बनी रहती है.
दो साल पहले ही ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिकों ने धरती के बादलों में जीवाणुओं की मौजूदगी का पता लगाया था और यह बात शुक्र के मामले में भी देखी जा सकने की संभावना है.
शुक्र के बादल भी धरती के बादलों की तरह वायुमंडल में काफ़ी ऊँचाई पर तैरते हैं और उनमें सल्फ़्यूरिक एसिड के रूप में जल भी मौजूद होता है.
इरविन और उनके सहयोगियों ने नासा को एक प्रस्ताव दिया है जिसमें एक यान भेज कर शुक्र के बादल के नमूने धरती पर लाने की पेशकश की गई है.
ऐसा होने पर ही धरती से परे जीवन होने एक और पहेली सुलझ सकेगी.