इबोला अंतरराष्ट्रीय 'ख़तरा', भारत सतर्क

  • 8 अगस्त 2014

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पश्चिमी अफ़्रीका में इबोला वायरस के प्रसार को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है.

इबोला वायरस से अब तक पश्चिमी अफ़्रीकी देशों में 900 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

दो दिनों तक चली डब्ल्यूएचओ की आपात बैठक के बाद संगठन ने कहा कि इस वायरस को रोकने के लिए असाधारण क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.

भारत में अभी तक इस वायरस के मामले देखने को नहीं मिले हैं.

लेकिन अब खतरा इस बात का है कि जिन देशों में ये वायरस तेज़ी से फैल रहा है वहां से आने वाले लोगों के ज़रिए ये वायरस भारत न आ जाए.

दिल्ली, मुंबई में सतर्कता

दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी के एक अधिकारी के अनुसार हवाई अड्डों पर सतर्कता बरती जा रही है.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉक्टर नरेंद्र सैनी ने बीबीसी हिंदी को बताया, “सभी बड़े एयरपोर्ट्स पर डॉक्टर्स की टीमें हैं जो पश्चिमी अफ्रीकी देशों से भारत आने वाले यात्रियों की जांच कर रही है.”

इसके अलावा कई बड़े अस्पतालों में अलग वार्ड बनाए जा रहे हैं जहां इबोला से पीड़ित मरीज़ों को रखा जा सके.

अब तक इबोला का कोई स्थायी उपचार नहीं आ सका है.

कैसे फैलता है इबोला?

विशेषज्ञ मानते हैं कि इबोला दूसरे वायरसों की तरह हवा से नहीं फैलता है लेकिन संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से इसका फैलाव संभव है.

माना जाता है कि चमगादड़ों की एक विशेष प्रजाती से ये वायरस इंसानों तक पहुंचा है, जो फिलहाल पश्चिमी अफ्रीकी देशों तक सीमित बताई जा रही है.

भारत में इसके पुख़्ता मामले अब तक नहीं मिले हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बीमारी का भारत में फैलना काफ़ी ख़तरनाक साबित होगा.

सरकार का प्रयास

स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने संसद को बताया कि उस बीमारी को भारत में फैलने से रोकने के लिए हरसंभव क़दम उढाए जा रहे हैं.

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि प्रभावित देशों के पास इस वायरस से निपटने की क्षमता नहीं है और उन्हें तुरंत अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत है.

गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. नाइजीरिया में भी कुछ मामले सामने आए हैं.

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