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इंटरनेट हो गया 25 साल का नौजवान

 बुधवार, 12 मार्च, 2014 को 16:21 IST तक के समाचार

25 साल पहले जब सर टिम बर्नर्स-ली वर्ल्ड वाइड वेब का प्रस्ताव लेकर आए, तो उस वक़्त वे स्विट्जरलैंड की एक प्रयोगशाला में काम कर रहे थे.

तब से लेकर अब तक वेब एक ऐसा तंत्र बन गया है, जो पूरी दुनिया में लोगों द्वारा सूचनाएं इस्तेमाल करने और उन्हें साझा करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी है.

यह कितना अहम है, यह इस बात से साफ़ है कि इसने आम लोगों के एक वर्ग की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी है या एक हद तक उस पर असर डाला है.

सर टिम बर्नर्स-ली, वर्ल्ड वाइड वेब के जन्मदाता

बीबीसी ब्रेकफ़ास्ट के बिल टर्नबाल ने सर टिम बर्नर्स-ली से पूछा कि क्या उन्हें इस बात का अंदाज़ा था कि उनका आविष्कार क्या स्वरूप लेगा?

तो उनका जवाब था, ''ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था.''

''यदि मैंने इसे कुछ ऐसा बनाया होता, जिसमें मालिकाना हक़ की बात निहित होती, तो यह शुरू नहीं हो पाता. यह शुरू ही इसलिए हो पाया क्योंकि लोग इसमें निवेश करने को तैयार थे, क्योंकि यह खुली और निःशुल्क चीज़ थी.''

शुरुआत में इसके सभी तरह के नाम हुआ करते थे. जैसे माइन ऑफ इन्फॉर्मेशन जिसका संक्षिप्त है एमओआई या जैसे दि इन्फॉर्मेशन माइन जिसका संक्षिप्त है टीआईएम.

'वर्ल्ड' एक वैश्विक शब्द है और गणितीय अर्थ में 'वेब' से आशय है कि किसी भी चीज़ को किसी से भी जोड़ा जा सकता है.

अन्य देशों के लोगों के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू अनजाना नहीं था, लेकिन यह शब्दों के प्रथम अक्षरों का ऐसा समूह है, जिसे पहले कभी इस्तेमाल में नहीं लाया गया था.

हावर्ड डेवीज़-कार, प्रसिद्ध चार्ली वीडियो के निर्माता

हावर्ड डेवीज़-कार के दोनों बच्चे रातों रात ऑनलाइन स्टार बन गए. हुआ यह था कि हावर्ड ने अपने छोटे बेटे का एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें वो अपने बड़े भाई हैरी की उंगली चबा रहा था.

यह क्लिप यू ट्यूब पर अबतक 6.7 करोड़ बार देखी जा चुकी है. इस पर आधारित एक मोबाइल फोन ऐप भी बनाया जा चुका है.

यहां तक कि हॉलीवुड की सैलिब्रिटीज़ और निर्देशकों ने भी अपने समय में इसकी नक़ल उतारी.

हावर्ड बताते हैं कि इस वीडियो को पोस्ट करते समय उन्होंने किसी बात की उम्मीद नहीं की थी. सिर्फ कुछ मित्रों और परिवार के सदस्यों से साझा करने का उद्देश्य था.

''लेकिन जिस पैमाने पर दुनिया भर में लोगों ने इसे सराहा और हमसे संपर्क किया उससे हम हैरान रह गए. इन सबके पास अपनी कहानी थी.''

''कई लोगों ने कहा कि इस वीडियो ने उन्हें कई बार सदमे से उबरने में मदद की. जब भी उनके बच्चे अस्पताल में होते या बुरे दौर से गुज़र रहे होते तो वे इस वीडियो को देख साहस बटोरते.''

स्टीव पैंखर्स्ट, फ्रेंड्स रीयुनाइटेड के संस्थापक

फ्रेंड्स रीयूनाइटेड इंग्लैंड की पहली सोशल नेटवर्क साइट है जो अस्तित्व में आई.

यह नेटवर्क पुराने स्कूली दिनों के दोस्तों से दोबारा जुड़ने में मददगार था.

अपने चरम पर इसके डेढ़ करोड़ सदस्य थे और 2005 में इसे आईटीवी ने 17.5 करोड़ पाउंड (क़रीब 1777.5 करोड़ रुपए) में ख़रीद लिया.

स्टीवेन पैंखर्स्ट बताते हैं कि वेब व्यक्तिगत रूप से उनके लिए क्या मायने रखता है.

''1990 की शुरुआत में मैं घर से काम करता था. तब यह गुमनाम जैसा था. उस समय केवल फ़ोन और रेडियो ही बाहरी दुनिया से जुड़े रहने के स्रोत थे.''

''आज की तारीख में मेरा ट्विटर लगातार अपडेट होता रहता है. कुछ समय पहले फ़ेसबुक पर अपलोड की गई तस्वीर पर लगातार टिप्पणियां आ रही हैं.''

''वेब मुझे पूरी दुनिया से इस क़दर जोड़े रखने का अहसास दिलाता है, जिसकी मैंने कल्पना तक न की थी.''

''मुझे लगता है कि जो कुछ किया जा सकता है उस ओर सिर्फ एक क़दम ही आगे बढ़े हैं. 25 साल गुज़र गए. अब सोचने का वक़्त है कि क्या मिला और क्या अभी पाना बाक़ी है.''

लॉरा ओलिन, सोशल स्ट्रेटजी की निदेशक, ओबामा 2012 कैंपेन

लॉरा ओलिन द्वारा पोस्ट की गई ओबामा की तस्वीर ने रीट्वीट का नया रिकॉर्ड बनाया.

नवंबर 2012 में बराक ओबामा अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए दोबारा चुने गए.

दोबारा चुने जाने के लिए चला यह अभियान इतिहास का सबसे बड़ा डिजिटल राजनीतिक प्रचार था.

उनके ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट की गई एक तस्वीर ट्विटर के इतिहास में सबसे ज्यादा रीट्वीट की जाने वाली तस्वीर बनी, जिस पर लिखा था 'चार साल और'. (अभी हाल ही में ऑस्कर की सेल्फ़ी की तस्वीर ने यह रिकॉर्ड तोड़ा है.)

लॉरा ओलिन राष्ट्रपति ओबामा के ट्विटर अकाउंट को चलाती थीं और उन्होंने ही यह तस्वीर पोस्ट की थी.

वेब ने प्रचार के बारे में बहुत सारी चीज़ें बदल दी हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि इसने राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल लोगों को बहुत हद तक बदल दिया है.

कुछ चंद धनाढ्य दानदाताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने वालों की अपेक्षा आम लोगों के लिए एक शक्तिशाली आंदोलन खड़ा करना ज़्यादा आसान हो गया.

बिना ऑनलाइन चंदा लिए और प्रचार के 2008 में ओबामा के राष्ट्रपति चुने जाने की कल्पना करना बेहद मुश्किल है.

सोशल मीडिया का ही असर है कि पहले के मुक़ाबले 2012 में लोगों तक पहुंचने के लिए हमारे पास ज़्यादा माध्यम थे.

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