'वो गले लगाना चाहता है लेकिन देख नहीं सकता'

  • 13 जनवरी 2014
निस्टेगमस, थॉमस
थॉमस की दृष्टि सुधारने के लिए उसकी आंखों का एक ऑपरेशन हो चुका है.

ब्रिटेन के मिडलैंड्स की निवासी निकोला ओट्स को हमेशा लगता था कि उनके बेटे थॉमस का बेढंगापन सामान्य है. लेकिन जैसे-जैसे वो बड़ा हुआ, समस्या बढ़ती गई. वो फर्श पर पड़ी किसी भी चीज़ पर लड़खड़ा जाता था और स्कूल में भी वो पिछड़ने लगा.

धीरे-धीरे थॉमस को एक और आदत पड़ गई, जब वो किसी चीज़ की ओर देखता तो सिर दाईं ओर घुमा देता और उसकी ठोड़ी नीचे की ओर होती.

निकोला कहती हैं, "ये बहुत ही अजीब था. वो ज़्यादातर समय सामान्य दिखता लेकिन जब वो किसी चीज़ पर आंखें टिकाता तो उस पर नज़रें ऊंची कर के देखता था.

वो कहती हैं, "चलते हुए वो दीवारों, कुर्सियों और लोगों से टकरा जाता था."

वो बताती हैं कि ये "आंखों को घूमने से रोकने" का थॉमस का अपना तरीका था, आंखों की एक ऐसी समस्या (निस्टेगमस) का लक्षण जिसका इलाज नहीं हो सकता.

निस्टेगमस, थॉमस
थॉमस ने देखने में आसानी के लिए सिर को मोड़ना सीख लिया.

इसे "अस्थिर दृष्टि" कहा जाता है क्योंकि इसमें आंखों पर नियंत्रण नहीं होता, निस्टेगमस में देखने में भी कई दिक्कतें होती हैं.

झिलमिलाती नज़र

साउथैम्पटन विश्वविद्यालय में ऑप्थैल्मिक जेनेटिक्स के वरिष्ठ लेक्चरर जैए सेल्फ़ कहते हैं , "ये बहुत दिक्कत करने वाला हो सकता है, इससे किसी की पूरी ज़िंदगी प्रभावित हो सकती है, उनके कामकाज, परिवारों और आने वाली पीढ़ियों पर भी असर पड़ता है."

वो कहते हैं कि निस्टेगमस "दुनिया को झिलमिल रोशनी में देखने" जैसा है, बच्चे चलती-फ़िरती चीज़ें देखने में दिक्कत महसूस करते हैं और चेहरे पहचानने में उन्हें दिक्कत होती है.

निस्टेगमस नेटवर्क यूके नाम की एक संस्था के जॉन सैंडर्स कहते हैं कि कुछ लोग जिन्हें निस्टेगमस होता है वो गाड़ी चला सकते हैं और ज़्यादातर को रोज़मर्रा की ज़िंदगी, पढ़ाई और रोज़गार में कुछ दिक्कतें होती हैं.

समस्या ये भी है कि जो लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं उनकी दिक्कतों को आंखों के सामान्य टेस्ट नहीं पकड़ पाते और ना ही नज़र की उनकी दिक्कतों की जांच हो पाती है.

उदाहरण के लिए थॉमस अब आठ साल का है लेकिन वो ऑप्टीशियन का चार्ट पढ़ सकता है इसलिए उसे न तो कमज़ोर नज़रों वाले लोगों की श्रेणी में रखा गया है न आंशिक दृष्टिदोष वाले लोगों की श्रेणी में.

इसके बावजूद उसे देखने में मदद चाहिेए, जैसे कि रोशनी या मैग्नीफ़ाइंग ब्लॉक की, ताकि वो पढ़ सके. उसे घर में चलने के लिए भी सहारे की ज़रूरत होती है. घर पर वो नीले लेंस वाले चश्मे पहनता है ताकि आंखों की रक्षा हो सके. शाम सात बजे तक वो देखने की कोशिश करते हुए बुरी तरह से थक चुका होता है.

निकोला कहती हैं, "उसे बहुत मुश्किल होती है. वो ये नहीं पता कर पाता कि वस्तुएं कितनी दूरी पर हैं. वो जब मुझे गले लगाता है तब भी उसे मेरे पैरों पर खड़ा होना पड़ता है ताकि पता लगा सके कि मैं कहां हूं."

ज़रूरत के मुताबिक इलाज

जैए सेल्फ़ ने निस्टेगमस के कारणों का पता लगाने के लिए सैकड़ों जीन का विश्लेषण शुरू कर दिया है. उनका लक्ष्य एक सामान्य जेनेटिक टेस्ट के विकास का है ताकि निस्टेगमस से प्रभावित बच्चों का जल्द पता लग सके.

वो ये भी चाहते हैं कि इलाज में असली ज़िंदगी के पैमानों का इस्तेमाल कर सकें - न कि आंखों के टेस्ट - ताकि प्रभावित लोगों की आंखों की समस्या का पता लग सके. ऐसा हुआ तो बच्चों को उनके मुताबिक इलाज मिल सकेगा.

निस्टेगमस, थॉमस
थॉमस की मां चाहती हैं कि उसे पूरी मदद मिले.

हालांकि सेल्फ़ कहते हैं कि ये इलाज न भी मिले तो भी कुछ ऐसे सामान्य कदम हैं जिनसे स्कूली बच्चों को मदद मिल सकती है. इनमें विशेष टीचर की मदद लेना और बच्चों को क्लास में उस जगह बिठाना शामिल है जहां उनकी नज़रों को दिक्कत न हो.

थॉमस जब आठ महीने का था तब एक रिश्तेदार ने उसकी आंखों की दिक्कत पकड़ी थी लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर ने उसका इलाज पांच साल की उम्र में शुरू किया था.

एक साल पहले थॉमस की आंखों का एक ऑपरेशन हुआ है और इस साल के अंत में भी एक ऑपरेशन होगा.

निकोला को कुछ सुधार दिखता है लेकिन थॉमस अब भी चलते हुए ये देखने के लिए अपने सिर को मोड़ता है कि वो कहां जा रहा है.

निकोला कहती हैं, "मुझे नहीं पता कि उसकी नज़र कैसी है लेकिन उसके लिए ये सब सामान्य है. लेकिन मैंने तय किया है कि मैं और सवाल पूछूंगी और उसकी मदद करूंगी. वो क्यों संघर्ष करे?"

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