क्या अब लद गए बैंक लुटरों के दिन?

  • 7 जनवरी 2014
बर्कले बैंक
लंदन में बैंक लूट की घटनाओं में 33 फ़ीसदी की कमी आई है

ब्रिटेन के विभिन्न बैंक की शाखाओं में पिछले एक दशक में बैंक लूट की घटनाओं में 90 फ़ीसदी तक की कमी आई है. यह आँकड़े ब्रिटेन के बैंक संगठन की तरफ़ से जारी किए गए हैं.

ब्रिटिश बैंकर्स एसोसिएशन (बीबीए) के मुताबिक़ साल 2011 में विभिन्न बैंकों में लूट की 66 घटनाएं हुई थीं. जबकि 1992 में बैंक लूट के 847 मामले हुए थे.

इस गिरावट का श्रेय नई तकनीक को दिया जाता है, जिसके कारण परंपरागत लुटेरों के लिए बैंक में डकैती बेहद मुश्किल हो गई है.

बीबीए के प्रमुख एंथनी ब्राउन कहते हैं, "टेलीविजन में दिखाए जाने वाले, नाटकीय सशस्त्र डकैती जैसे हादसों को रोकने के लिए बैंक कड़े क़दम उठा रहे हैं."

उन्होंने कहा, "किसी डकैती वाली परिस्थिति में फंसना बैंक स्टाफ़ और ग्राहकों के लिए डरावना अनुभव होता है, जो दशकों तक उनकी ज़िंदगी को झकझोरता रहता है."

(पढ़ेंः चोरों के लिए बुरी ख़बर, एटीएम थाने में..)

बैंक लूट में कमी

ब्राउन कहते हैं, "यह देखना काफ़ी अच्छा है कि हाल के वर्षों में इस तरह के अपराधों में तेज़ी से कमी आई है. बैंक लूटने की योजना बनाने वालों को बेहतर सीसीटीवी, प्रोटेक्टिव स्क्रीन सेकेंडों में सामने ले आते हैं. यहाँ तक कि ख़ास किस्म की धुंध का इस्तेमाल लुटेरों को तितर-बितर करने के लिए किया जाता है."

उनका कहना है, "सभी बैंक और पोस्ट ऑफ़िस आपस में सहयोग जारी रखने के साथ-साथ पुलिस के साथ मिलकर बैंक डकैतीकी घटनाओं को बीत जमाने की बात बना देंगे."

इसी तरह की प्रवृत्ति अमरीका में भी देखी जा रही है, जहाँ एफ़बीआई के आँकड़ों के मुताबिक़ 2012 में पूरे देश में बैंक लूट की तीन हज़ार आठ सौ सत्तर घटनाएं हुईं, जो पिछले एक दशक में सबसे कम हैं.

अपराधियों को रोकने और बैंक कर्मियों को सुरक्षित बनाने के लिए बैंकों ने सुरक्षा तकनीक में निवेश बढ़ाया है.

इसके तहत आपातकालीन बटन दबाने पर ऑटोमेटिक तरीके से बंद होने वाले बैरियर और लुटेरों को भटकाने के लिए ख़ास तरह की धुंध की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

बैंक में लूट की स्थितियों में 'डीएनए' स्प्रे का भी उपयोग किया जाता है, इससे लुटेरों की त्वचा पर लगे निशान से उनकी पहचान आसान हो जाती है कि वे घटना स्थल पर मौजूद थे. इसे आसानी से धोया नहीं जा सकता है.

इस तरह के उपायों के साथ-साथ बैंक इस बात का भी विशेष ध्यान रखते हैं कि पहले के वर्षों की तुलना में कम नकदी अपने पास रखी जाए.

ऑनलाइन हैं ख़तरे

दक्षिणी इंग्लैण्ड का एक बैंक
बैंक तकनीकी सुरक्षा में निवेश करके बैंक लूट की घटनाओं का मुकाबला कर रहे हैं.

हालांकि बैंक लूट की घटनाओं में कमी आ रही है लेकिन बैंकों और उनके ग्राहकों का डर बना हुआ है.

बीबीसी के बिज़नेस संवाददाता ने बताया कि मेट्रोपोलिटन पुलिस के आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़ लंदन में बैंक लूट की घटनाओं में 33 फ़ीसदी की कमी आई है, यह कमी पिछले एक दशक में हुई है. लेकिन चोरों की नज़र बैंकों में पैसे पहुंचाने वाली गाड़ियों पर है.

सबसे ख़ास बात वित्तीय लेन-देन से जुड़े साइबर अपराधों के बढ़ते मामले हैं. नई पीढ़ी के लुटेरे या हैकर व्यक्तिगत जानकारियों की जासूसी कर रहे हैं और उसे बाज़ार में बेच रहे हैं.

एक ताज़ा शोध के अनुसार किसी व्यक्ति से जुड़ी सारी जानकारी की ऑनलाइन काला बाज़ारी हो रही है, जहाँ 30 डॉलर का भुगतान करके उसके खातों से जुड़ी सारी जानकारी जुटाई जा सकती है.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार