BBC navigation

आईवीएफ हो सकता है दोगुना फ़ायदेमंद

 रविवार, 22 दिसंबर, 2013 को 05:56 IST तक के समाचार
आईवीएफ

शोधकर्ता दावा कर रहे हैं कि यदि निषेचित अंडों के अनुवंशिक कोड की टोह ली जाए तो आईवीएफ की सफलता की दर को दोगुना किया जा सकता है.

पेकिंग यूनिवर्सिटी और हावर्ड यूनिवर्सिटी की टीम के मुताबिक यदि क्लिक करें सेहतमंद भ्रूण का पता लगाने के लिए नई स्क्रीनिंग विधि का इस्तेमाल किया जाए तो आईवीएफ को 60 फीसदी ज़्यादा सफल बनाया जा सकता है.

इस टीम का कहना है कि चीन में इस प्रक्रिया का परीक्षण किया गया है और इसके नतीजों ने ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए नई संभावनाएं जगाई हैं.

ब्रिटेन के प्रजनन विशेषज्ञ ने कहा है कि सेल पत्रिका में छपे इस शोध को समझने में ख़ास एहतियात बरतनी होगी.

आनुवंशिक समस्या

"कई बार मां के डीएनए में किसी तरह की आनुवंशिकी गड़बड़ी होने के कारण आईवीएफ सफल नहीं होता, गर्भपात हो जाता है. कई बार बच्चे में भी आनुवंशिक समस्या पनप जाती है. लेकिन इस नए तकनीक के जरिए बढ़ रहे भ्रूण की आनुवंशिक असमान्यताओं की जांच की जा सकती है. "

जिआओलिंग सन्नी जेईः शोधकर्ता

आईवीएफ तकनीक के जरिए अण्डाणु और शुक्राण को प्रयोगशाला में एक परखनली के भीतर मिलाया जाता है. इसके बाद बने भ्रूण को मां के गर्भ में आरोपित कर दिया जाता है.

आईवीएफ की सफलता को अधिकतम करने के लिए प्रजनन से जुड़े क्लीनिक कई तरह की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अपनाते हैं. ये क्लीनिक इन प्रक्रियाओं की मदद से भ्रूण आरोपित करने का सबसे सुरक्षित तरीका तलाशते हैं.

बढ़ रहे भ्रूण से कोशिकाओं को हटाने का तरीका अक्सर इन तरीकों में से एक होता है. ऐसे में यह भी संभव है कि इसमें सभी आनुवंशिक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा सकता है.

यह नया तरीका अंडाणु दान करने वाले किसी वालंटियर से लिए गए 70 निषेचित अंडों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है. यह नया तरीका ध्रुवीय निकाय के नाम से जाना जाने वाले कोशिका मे बचे खुचे टुकड़ों को नए नए विकसित हो रहे भ्रूण से हटाने और उनकी संपूर्ण आनुवंशिकी कोड का विश्लेषण करने पर आधारित रहा.

आईवीएफ

पेकिंग यूनिवर्सिटी के मुख्य शोधकर्ता जीई क्वीओ ने कहाः "सैद्धांतिक रुप से देखा जाए तो अगर यह तरीका सफल हुआ तो हम टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक की सफलता को 30 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी या इससे भी ज़्यादा कर सकते हैं."

अधिक उम्र की महिला

शोधकर्ताओं में से एक हावर्ड यूनिवर्सिटी के जिआओलिंग सन्नी जेई कहते हैं कि कई बार मां के डीएनए में किसी आनुवंशिकी गड़बड़ी होने के कारण आईवीएफ़ सफल नहीं होता, या गर्भपात हो जाता है. कई बार बच्चे में भी आनुवंशिक समस्या पनप जाती है. लेकिन इस नई तकनीक के ज़रिए बढ़ रहे भ्रूण में मां द्वारा दान किए गए डीएनए में आनुवंशिक असमान्यताओं के होने की जांच की जाती है.

उन्होंने कहा, "यह तरीका उन महिलाओं क लिए बेहद कारगर साबित होने वाला है जिनपर आईवीएफ़ तकनीक लगातार असफल होती है. यह तरीका ख़ासकर अधिक उम्र की महिलाओं में भ्रूण उपचार को अधिक सफल बना सकता है."

आईवीएफ

उन्होंने बीबीसी को बताया, "हमारे पास इन सिद्धांत के प्रमाण हैं. इसका चिकित्सीय परीक्षण पहले ही शुरू किया जा चुका है. इसने आईवीएफ़ की लगातार विफलता से जूझ रही महिलाओं के लिए आशा बन कर आया है."

दुनिया भर में ऐसे 15 फीसदी जोड़े ऐसे हैं जो संतान पैदा करने में शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं. इसमें से कई जोड़ों ने बच्चा पाने के लिए आईवीएफ़ का सहारा लिया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.