जहां आवाज़ ही पहचान है...

  • 13 नवंबर 2013

बड़े व्यवसायों को ज़रूरत है आपकी आवाज़ की लेकिन अपनी सेवाओं की गुणवत्ता जानने के लिए नहीं बल्कि धोखेबाज़ों से निपटने के लिए.

वॉयस बायोमीट्रिक्स यानी आवाज़ के नमूनों की रिकार्डिंग और विश्लेषण ताकि पहचान सुनिश्चित की जा सके. ये धोखेबाज़ों के ख़िलाफ़ लड़ाई में नया तकनीकी हथियार है.

नेशनल फ्रॉड अथॉरिटी (एनएफ़ए) के अनुसार इस तरह की धोखाधड़ी से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को हर साल 52 अरब पाउंड की चपत लगती है.

एनएफ़ए का कहना है कि अकेले ब्रिटिश वित्तीय सेवाओं से ही पांच अरब पाउंड उड़ा लिए जाते हैं. हालांकि आंकड़े दो गुने या तीन गुने ज़्यादा भी हो सकते हैं क्योंकि धोखाधड़ी के बहुत से मामले रिपोर्ट ही नहीं किए जाते.

डिजिटल युग ने धोखा करने की संभावनाओं को और ज़्यादा बढ़ा दिया है. ख़ासकर तब जब ऐसा करने वालों के पास निजी सूचनाएं चुराने के बहुत से रास्ते मौजूद हैं.

पहचान चुराने और खाता हैक कर लेने की समस्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है.

आवाज़ के फ़ायदे

बायोमीट्रिक्स प्रणाली मानवीय व्यवहार, हस्तचिन्हों या आवाज़ का अध्ययन करती है

आवाज़ के नमूने इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि इसकी नकल करना या चुराना बेहद मुश्किल है.

वैलिडसॉफ़्ट कंपनी के मार्केटिंग विभाग के विश्व प्रमुख ईमानुएल फ़िल्सज्यां रीटेल बैंकों को सुरक्षा और यूरोपीय सरकारों को सरहद पार होने वाली धोखाधड़ी से निपटने के तरीक़ों पर सलाह देते हैं.

वह कहते हैं कि बायोमीट्रिक्स के लिहाज से आवाज़ एक गतिशील नमूना है. यह अंगुलियों के चिन्हों की तरह स्थिर नहीं है इसलिए इसकी डिजिटल नकल उतारना बेहद मुश्किल है.

आवाज़ के डिजिटल नमूनों में 100 से ज़्यादा पहचाने जा सकने वाले तत्व होते हैं.

वॉयस बायोमीट्रिक्स कंपनियों का मानना है कि जटिल गणितीय प्रणालियों और अत्याधुनिक मशीनों के ज़रिए 97 फ़ीसदी मामलों में लोगों की बिल्कुल सही पहचान की जा सकती है.

यहां तक कि दो जुड़वा बच्चों में भी, जिनका डीएनए समान है, उन्हें उनकी आवाज़ के नमूने से अलग-अलग पहचाना जा सकता है.

यह तकनीक को ज़्यादा भरोसेमंद बनाता है ताकि इसे कोर्ट में सुबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.

कमियां

दो जुड़वा बच्चों के बायोमीट्रिक नमूने भी एक दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं जिनसे पहचान करना ज़्यादा आसान है

आवाज़ बहुत अहम है क्योंकि इंटरनेट बैंकिंग और ख़रीदारी की शुरूआत होने के बावजूद कंपनियों से संपर्क के लिए कॉल सेंटर ही मुख्य ज़रिया है.

पहचान क़ायम करने के परंपरागत तरीक़े जैसे पिन कोड, पासवर्ड या याद पर आधारित सवाल दोषपूर्ण साबित हुए हैं क्योंकि हममें दोष हो सकता है- हम भूल जाते हैं.

यही वजह है कि हम बेहद साधारण पिन कोड या पासवर्ड रखते हैं जो हमें याद रहते हैं और दूसरे के लिए अनुमान लगाना आसान होता है.

धोखाधड़ी की जांच करने वालों ने पाया है कि पिन चोरी के मामलों में तकरीबन 10 फ़ीसदी में कोड 1-2-3-4 जैसा बेहद सामान्य रखा गया था.

एक तकनीकी कंपनी सेस्टेक के मुख्य कार्यकारी प्रोफ़ेसर लेवेन्ट आर्सलन कहते हैं, "आप अपनी आवाज़ नहीं भूल सकते. आपकी आवाज़ का इस्तेमाल ज़्यादा आसान है."

टेस्ट

आवाज़ की पहचान में ज़रा सी भी गड़बड़ी होने पर उपभोक्ता की आवाज़ का लाइव टेस्ट शुरू हो जाएगा. इसके साथ धोखाधड़ी करना लगभग असंभव है ख़ासकर जब वे एक रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल कर रहे हों.

बार्कले की वित्तीय शाखा बार्कले वेल्थ का दावा है कि आवाज़ से जुड़े बायोमीट्रिक्स लागू करने के बाद से कंपनी को काफ़ी फ़ायदा हुआ है.

अंगुलियों के चिन्हों के बजाय आवाज़ के बायोमीट्रिक्स ज़्यादा भरोसेमंद हैं

इस तकनीक का इस्तेमाल करने से पहले, उसके एजेंट्स को मिलने वाली 25 फ़ीसदी धोखे वाली फ़ोन कॉल्स के लिए मुमकिन था कि वे बैंक की सुरक्षा प्रणाली को चकमा दे सकें.

अब बैंक का कहना है कि ऐसी फ़ोन कॉल्स की तादात शून्य पर आ गई है.

पेचीदा

स्लोवाकिया के टाट्रा बैंक ने भी वॉयस बायोमीट्रिक प्रणाली का प्रयोग शुरू किया है जिससे कॉल सेंटर के एजेंट्स से बात करते समय उपभोक्ताओं की आवाज़ की पहचान की जाएगी.

बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद आवाज़ के नमूने से पहचान स्थापित करने में महज़ 10 से 15 सेकेंड का वक्त काफ़ी होता है लेकिन इसमें कुछ पेचीदगियां हैं.

उपभोक्ताओं को इस प्रणाली के तहत सूचीबद्ध करना मुश्किल है क्योंकि आवाज़ की रिकॉर्डिंग करने के लिए निजता से जुड़े क़ानूनों और क्षेत्राधिकारों में विभिन्नता है.

इसके अलावा सिर्फ़ आवाज़ के बायोमीट्रिक्स से काम नहीं चलता. संचार आंकड़ों के विश्लेषण जैसी दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल भी करना पड़ता है.

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