ये है 'सबसे बदसूरत' प्राणी

  • 15 सितंबर 2013
ब्लॉबफिश, बदसूरत, जानवर

तुनकमिज़ाज दिखने वाली ब्लॉबफिश को बदसूरत जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन अग्ली एनिमल प्रिज़र्वेशन सोसायटी का आधिकारिक शुभंकर चुना गया है.

इससे ब्लॉबफिश अनाधिकारिक रूप से दुनिया की सबसे बदसूरत जीव बन गई है. इस संगठन के इस अभियान का मक़सद उन जानवरों की ओर ध्यान खींचना था जो 'उतने सुंदर' नहीं हैं और विलुप्त होने की ओर हैं.

ब्लॉबफिश के नाम का एलान न्यूकैसल में ब्रिटिश साइंस फेस्टिवल में किया गया.

प्रोबोसिस बंदर, सूअर की तरह नाक रखने वाले कछुए, टिटिकाका "स्क्रोटम फ्रॉग" और गुप्तांगों की जूँ जैसे जीवों को पछाड़कर ब्लॉबफिश सबसे बदसूरत जीव चुनी गई है.

अग्ली एनिमल प्रिज़र्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष और जीव विज्ञानी सिमोन वाट ने कहा कि इस अभियान से इन विलुप्त होने का ख़तरा झेल रहे जीवों की ओर ध्यान जाएगा.

एक्ज़ोलोट्ल, बदसूरत, जानवर

सिमोन वाट ने कहा, "जीवों के संरक्षण के प्रति हमारा नज़रिया अहंवादी है. हम सिर्फ़ ऐसे जानवरों की रक्षा करते हैं जिनके प्यारे होने की वजह से हम उनसे जुड़ पाते हैं, जैसे पांडा. मुझे पांडा से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन

उनके अपने समर्थक हैं. इन प्रजातियों को मदद की ज़रूरत है."

'आज किसकी मौत हुई?'

सिमोन वाट का कहना है कि ब्लॉबफिश के सबसे बदसूरत जानवर चुने जाने से जीव संरक्षण के प्रति नज़रिए को एक मज़ाकिया पक्ष भी मिलेगा.

टिटिकाका मेंढक
कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि टिटिकाका झील में हलचल पैदा करता है ताकि ऑक्सीजन का स्तर बढ़े.

वाट कहते हैं, "ये बेहद निराश कर देने वाले विज्ञान में से एक हैं, देखें तो ये पता लगाना है कि : आज किसकी मौत हुई?"

इस अभियान के लिए सिमोन वाट ने कई हास्य कलाकारों के साथ मिलकर काम किया, जिनमें से हर एक ने यूट्यूब पर इस अभियान के हर जीव के लिए एक संदेश तैयार किया.

फिर अग्ली एनिमल प्रिज़र्वेशन सोसायटी ने लोगों से अपने पसंदीदा बदसूरत जानवर के लिए वोट करने को कहा.

ब्लॉबफिश को करीब 10 हज़ार वोट से जीत मिली.

ब्लॉबफिश दक्षिण पूर्वी ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया के तट के पास 600 से 1200 मीटर की गहराई पर पाई जाती है, जहां वातावरण का दबाव समुद्र तल से कई दर्जन गुना ज़्यादा होता है.

इसका जिलेटिन जैसा शरीर पानी से थोड़ा ही गाढ़ा होता है, ये अपना जीवन गहराइयों में "हिचकोले खाते हुए" बिता देती है.

ये झींगा और केकड़े खाती है और इस वजह से इसे मछली पकड़ने वाली नावों से खतरा होता है. हालांकि इसे खाया नहीं जा सकता लेकिन ये जालों में फंस जाती है.

टिटिकाका स्क्रोटम मेंढक की त्वचा पर पड़ी झुर्रियां इसे झीलों में सांस लेने में मदद करती हैं.

इस सूची में शामिल दूसरे जीवों के आवास को भी इसी तरह का खतरा है और सिमोन वाट को उम्मीद है कि इस अभियान से इस तथ्य पर ध्यान जाएगा कि संरक्षण में जीवों के आवास पर ध्यान देने की ज़रूरत है न कि विशिष्ट प्रजातियों पर.

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