क्या है यूरोप में दस में से एक मौत का कारण?

  • 9 सितंबर 2013
धूम्रपान निषेध

यूरोपीय रेस्परेटरी सोसाइटी ने हाल ही में जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि यूरोप में होने वाली मौतों के 10 मामलों में से एक फेफड़े की बीमारी की वजह से होती है और धूम्रपान इसका एक बड़ा कारण है.

रिपोर्ट के अनुसार अतीत में धूम्रपान की ऊंची दर के कारण आने वाले 20 सालों में फेफड़े का कैंसर और 'क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी)' से होने वाली मौतों में इजाफा होगा.

कैंसर का इलाज

लेकिन एक ब्रिटिश लंग चैरिटी संस्था ने कहा है कि ब्रिटेन में होने वाली चार मौतों में से एक का कारण फेफड़े की बीमारी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक इसकी रोकथाम, इलाज और शोध को लेकर खर्च पर कोई तवज्जो नहीं दी गई है.

'यूरोपीयन लंग ह्वाइट बुक' नामक प्रकाशन में दर्शाए गए आंकड़े, फेफड़े की बीमारियों के ढर्रे का विश्लेषण करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और ''यूरोपीयन सेंटर फॉर डिसीज प्रीवेंशन एण्ड कन्ट्रोल'' के ताजातरीन आंकड़ों के आधार पर तैयार किए गए हैं.

बीमारी

मानव शरीर की श्वसन प्रणाली
साँस की बीमारियों की बड़ी वजह धूम्रपान की आदत है.

रिपोर्ट के अनुसार यह पाया गया है कि अटलांटिक से लेकर मध्य एशिया तक फैले 'डब्ल्यूएचओ यूरोपीयन रीजन' में फेफड़े की आम तौर पर सबसे घातक चार बीमारियाँ न्यूमोनिया, सीओपीडी, कैंसर और टीबी वहाँ होने वाले मौत के मामलों की मुख्य वजह है.

ह्वाइट बुक के अनुसार यूरोपीय संघ के 28 देशों में ये बीमारियां आठ में से एक मौत के लिए ही जिम्मेदार हैं.

फेफड़े के कैंसर में कारगर

केवल बेल्जियम (एक लाख आबादी पर 117 मौत के मामले), डेनमार्क, हंगरी और आयरलैण्ड ही फेफड़े की बीमारियों से होने वाली मृत्यु के मामलों में ब्रिटेन से आगे है. ब्रिटेन में यह दर एक लाख आबादी पर 112 है.

फिनलैंड और स्वीडन में सबसे कम मृत्युदर क्रमशः एक लाख पर 53.7 और 55.7 है.

लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि फेफड़े की बीमारी से होने वाली कुल मौतों का अनुपात ब्रिटेन और आयरलैंड में सबसे अधिक है. यह एक ऐसा आंकड़ा है जो ब्रिटिश लंग फाउण्डेशन के अनुसार चार में से एक है.

स्वास्थ्य

ह्वाइट बुक के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि श्वसन संबंधी बीमारियों से होने वाली कुल सामाजिक आर्थिक क्षति का कारण धूम्रपान है.

रिपोर्ट में धूम्रपान को यूरोप में सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या करार दिया गया है और कहा गया है कि फेफड़े के कैंसर, सीओपीडी, हृदय रोग जैसी बीमारियों से होने वाली मृत्यु की मुख्य वजह धूम्रपान है जिसकी रोकथाम की जा सकती है.

कैंसर का रहस्य

हालांकि 1970 के बाद से डेनमार्क और ब्रिटेन जैसे उच्च मृत्यु दर वाले देशों में धू्म्रपान की दर काफी गिरी है लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि लम्बे समय की ये आदतें कैंसर और सीओपीडी जैसी बीमारियों की दर के ऊंचा बने रहने का कारण हैं.

इसका मतलब है कि फेफड़े के संक्रमण में कमी आने के अनुमान के बावजूद फेफड़े की बीमारियों से होने वाली मौतों के अनुपात में आगामी 20 वर्षों तक स्थिरत बनी रहने की संभावना है.

एकमात्र उपाय

धूम्रपान निषेध

साल 2000 से ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) उन लोगों को मुफ्त सलाह और दवाएं उपलब्ध कराता रहा है जो धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं.

खतरा है वायु प्रदूषण

पूरे यूरोप के अस्पतालों से इकट्ठे आंकड़ों के विश्लेषण का हवाला देते हुए ह्वाइट बुक में कहा गया है कि आंकड़ों में अधिक विषमता पाई गई है कि मृत्यु दर के ढर्रे से यह मेल नहीं खाता.

यूरोपीय रेस्परटॉरी सोसाइटी के अध्यक्ष प्रोफेसर फ्रांसिस्को ब्लासी कहते हैं, ''यदि जीवन प्रत्याशा, व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता और समाज पर आर्थिक बोझ को यूरोप एवं दुनिया भर में कम करना है तो फेफड़ों की बीमारी के रोकथाम और इलाज में सुधारना लाना होगा.''

ब्रिटेन की तस्वीर

ब्रिटिश लंग फाउण्डेशन के प्रोफेसर रिचर्ड हबार्ड कहते हैं कि रिपोर्ट ब्रिटेन में साँस से सबंधित बीमारियों के बोझ की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती है.

कैंसर का पता

प्रोफेसर हबार्ड के अनुसार कैंसर और सीओपीडी जैसी बीमारियां हर साल हजारों लोगों की जान ले लेती हैं लेकिन इनके अलावा फेफड़े की 40 से अधिक बीमारियां हैं.

इनमें से आइपीएफ और मीसोथेलियोमा जैसी कुछ बीमारियों में मृत्युदर दशकों से लगातार बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में फेफड़े के कैंसर से होने वाली मृत्यु दर के उच्च होने का एक यह भी कारण है कि रोगी चिकित्सक के पास बहुत बाद में पहुंचते हैं.

प्रोफेसर हबार्ड ने कहा कि फेफड़े की बीमारियों के इलाज और रोकथाम को लेकर एनएचएस की तरफ से जरूरी ध्यान नहीं दिया गया और शोधकर्ताओं को पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया.

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