'स्काइप' ने मिटा दी दुनिया की दूरी

  • 31 अगस्त 2013
लंदन में रहने वाली लू यंग स्काइप के जरिए बेटी की दादा- दादी से कराती हैं बात.

दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने में बैठे अपनों को देखने की हसरत पूरा कराने वाली ऑन लाइन वीडियो चैट सर्विस 'स्काइप' 10 साल की हो गई है.

दुनिया के लाखों लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) और वीडियो चैट सेवा को हम आज हल्के में लेते हैं लेकिन 10 साल पहले शुरू हुई इस सेवा का जब कुछ लोगों ने पहली बार इस्तेमाल किया तो वे खुद पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे थे.

आज स्काइप की तरह कई कंपनियां ऐसी सेवा दे रही हैं. गूगल हैंगआउट्स, एपल की फेसटाइम, ब्लैकबेरी की बीबीएम, टैंगो और वीबर कुछ ऐसी ही लोकप्रिय सेवाएं हैं.

पहली बार स्काइप का इस्तेमाल करने वाले एक दंपति लू यंग और हामिद सिरहान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. लंदन में रहने वाले इस दंपति के परिवार में जब किलकारी गूंजी तो वे बहुत खुश हुए.

लेकिन लू यंग को पता था कि वह चीन में रहने वाले अपने माता-पिता के साथ इस खुशी को नहीं बांट सकती. ऐसे में स्काइप उनके लिए इस मुराद को पूरा कराने का ज़रिया बना.

उन्होंने स्काइप के ज़रिए वीडियो कॉल कर अपने माता-पिता को उनकी पोती से मिलवाया .

यंग कहती हैं, ''हम हर शाम को उनसे बात करते हैं और उनके लिए पोती को बढ़ते हुए देखने का यही एक मात्र जरिया है. वे लंदन आने का खर्च नहीं उठा सकते, और हम भी बीजिंग नहीं जा सकते.''

आज यंग अन्य लोगों से संपर्क स्थापित करने में भी इस सेवा का इस्तेमाल करती हैं.

दरअसल, इस तकनीक ने यंग जैसी किसी मध्यवर्गीय महिला का ही नहीं बल्कि दुनिया के तमाम लोगों की जिंदगी को बदल दी है.

अमरीका के सिएटल के बाल अस्पताल के डॉक्टर डॉ. मनीष बत्रा स्काइप के ज़रिए युगांडा के डॉक्टरों को विशेष जानकारियां देते हैं.

उनका कहना है कि ईमेल या फोन की तुलना में वीडियो के जरिए जटिल प्रक्रियाओं को समझाना आसान हो जाता है.

साल 2011 में माइक्रोसॉफ्ट को स्काइप को खरीद लिया.

साल 2011 में दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने 8.5 अरब डॉलर में स्काइप को खरीद लिया था.

लेकिन संभवतः लोगों को यह नहीं पता होगा कि माइक्रोसॉफ्ट के कॉरपोरेट मामलों के उपाध्यक्ष (स्काइप) मार्क जिलेट का इस सेवा के बारे में अनुभव कम दिलचस्प नहीं है.

इस बारे में जिलेट ने बीबीसी से कहा, ''करीब एक साल पहले मैंने कुछ तस्वीरें देखीं जिसमें लोगों ने अपने पूरे परिवार को इकट्ठा करने के लिए अपने लैपटॉप को एक प्रोजेक्टर से जोड़ रखा था.''

उन्होंने कहा, ''उत्तर कोरिया और चीन में एक ऐसा परिवार था जो कभी भी एक-दूसरे से नहीं मिला था. लेकिन वीडियो चैट ने दुनिया की इस भौगोलिक दूरी को पाटने का काम किया.''

इन तमाम अच्छाइयों के बीच इस तकनीक का इस्तेमाल कुछ गलत उद्देश्यों के लिए भी किया जाने लगा है.

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलियाई सेना के एक जवान को स्काइप के जरिए कुछ अनैतिक गतिविधियों को दिखाते हुए पकड़ा गया. लेकिन इन सबके बावजूद स्काइप लोगों की ज़िंदगी के लिए अहम बना हुआ है.

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