हत्या और बलात्कार का रिश्ता मौसम से?

  • 2 अगस्त 2013

शोध पत्रिका साइंस में प्रकाशित एक शोध के अनुसार दुनिया में हिंसा के घटने-बढ़ने और जलवायु परिवर्तन में सीधा संबंध है.

अमरीकी वैज्ञानिकों के दल ने अपने शोध में पाया है कि तापमान गिरने या बारिश होने जैसे मामूली जलवायु परिवर्तन का भी हिंसा, बलात्कार, हत्या, समूहों के बीच टकराव और युद्ध से सीधा संबंध हो सकता है.

वैज्ञानिकों के इस दल का अनुमान है कि वैश्विक तापमान में दो सेंटीग्रेड की बढ़ोत्तरी होने पर व्यक्तिगत हिंसा के 15 प्रतिशत और सामूहिक हिंसा के 50 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना रहती है.

वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति देखते हुए पूरी दुनिया के और ज़्यादा हिंसक होने की संभावना है.

इस शोध से जुड़े कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के मार्शल बर्क कहते हैं, “अपने निरीक्षण के दौरान हमने कई काल खंडों और कई प्रमुख महाद्वीपों का अध्ययन किया. हमने पाया कि जलवायु परिवर्तन और हिंसा के बीच गहरा संबंध है.”

इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया में कई सौ सालों के आंकड़ों के आधार पर किए गए 60 से ज़्यादा अध्ययनों की पड़ताल की.

इस शोध में सूखे के दौरान भारत में घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी और अमरीका में लू चलने के दौरान छीनाझपटी, बलात्कार और हत्या के मामले में बढ़ोत्तरी के मामलों का उदाहरण दिया गया है.

साइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध में इस बात की ओर भी इशारा किया गया है कि यूरोप में होने वाली नस्लीय टकराहटों और अफ्रीका में होने वाले गृहयुद्ध का बढ़ते हुए तापमान से अंतर्संबंध है.

शंका

जलवायु परिवर्तन और हिंसा
अफ्रीका के गृहयुद्ध और जलवायु परिवर्तन के बीच अंतर्संबंध होने पर कुछ वैज्ञानिकों ने शंका जताई है.

वैज्ञानिकों का यह दल अब इस बात का अध्ययन कर रहा है कि जलवायु परिवर्तन और हिंसा में परिवर्तन के संबंध के पीछे कौन से कारण हैं.

मार्शल बर्क कहते हैं, “हम पूरी सावधानी के साथ इस परिघटना का अध्ययन कर रहे हैं. हम किसी खास घटना को मौसम में होने वाले किसी खास परिवर्तन से नहीं जोड़ सकते लेकिन हमें जो परिणाम प्राप्त हुए हैं वो रुचिकर हैं.”

“हमारे पास जो दस्तावेज हैं उनसे कुछ अनुमान लगाए जा सकते हैं. जलवायु परिवर्तन का एक खास संबंध आर्थिक स्थिति से दिखता है. हम जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन का पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति पर फर्क पड़ता है, खास तौर पर उन समाजों में जिनकी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है. हमारे पास इस बात के भी पर्याप्त सबूत हैं कि लोगों के किसी विद्रोह में हिस्सेदारी के निर्णय और उनकी आर्थिक स्थिति के बीच सीधा संबंध होता है.”

मार्शल बर्क के अनुसार इन परिवर्तनों का आधार जलवायु परिवर्तन के कारण शरीर में आने वाले बदलाव भी हो सकते हैं. कुछ अध्ययनों में इस बात की ओर इशारा किया गया है कि गर्मी बढ़ने पर लोगों के हिंसक होने की संभावना बढ़ जाती है.

वैज्ञानिक अपने शोध के अगले चरण में जलवायु में होने वाले विशेष परिवर्तनों का समाज में पड़ने वाले विशेष प्रभावों का अध्ययन करेंगे.

हालाँकि अन्य वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन और हिंसा में बढ़ोत्तरी के बीच किसी तरह के अंतर्संबंध होने के अनुमान पर शंका जताई है.

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस से प्रकाशित प्रपत्र में कहा गया है कि अफ्रीका में हुए गृहयुद्ध का जलवायु परिवर्तन से कोई संबंध नहीं था.

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के अनुसार अफ्रीका के गृह युद्ध का जलवायु परिवर्तन से ज़्यादा संबंध शिशु मृत्यु दर, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से निकटता तथा उच्च जनसंख्या घनत्व दर से था.

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