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साबुन-पानी से बढ़ेगी बच्चों के विकास की गति

 रविवार, 4 अगस्त, 2013 को 04:46 IST तक के समाचार
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गंदे पानी का सीधा असर बच्चों के विकास पर पड़ता है

साफ़ पानी और साबुन न सिर्फ़ स्वच्छता को बढ़ाते हैं बल्कि यह बच्चों के विकास में भी तेजी ला सकते हैं.

दुनिया भर से एकत्र किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि बेहतर सफ़ाई वाले घरों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की ऊंचाई 0.5 सेंटीमीटर तक बढ़ी है.

ये अध्ययन बांग्लादेश, इथियोपिया, नाइजीरिया, चिली, ग्वाटेमाला, पाकिस्तान, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, केन्या और कंबोडिया में किए गए.

विश्व भर में 26.50 करोड़ बच्चे विकास की कमी से जूझ रहे हैं जिनका क्लिक करें स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ता है.

बौनेपन में फ़ायदा

लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (एलएसएचटीएम) और इंटरनेशनल चैरिटी वाटरएड की देखरेख में करीब 10,000 बच्चों पर किए गए 14 शोधों से हासिल क्लिक करें तथ्यों का विश्लेषण किया गया जिसे कोक्रेन रिव्यू कहा जा रहा है.

एलएसएचटीएम में आम लोगों के स्वास्थ्य व आहार विज्ञानी डॉ एलन डेन्गोर कहते हैं कि साफ़ पानी, सफ़ाई व्यवस्था और स्वच्छता प्रदान कर डायरिया जैसी बीमारियों से होने वाली क्लिक करें मौतों को टाला जा सकता है.

वह कहते हैं कि पहली बार विश्लेषकों ने यह कहा है कि इन सुविधाओं का बच्चों के विकास पर थोड़ा लेकिन महत्वपूर्ण पड़ता है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “इन सभी प्रमाणों को साथ लाने से पहली बार यह लग रहा है कि इन सुविधाओं से बच्चों का विकास क्लिक करें बेहतर हो सकता है और यह बहुत महत्वपूर्ण बात है.”

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बार-बार बीमार पड़ने से बच्चों के विकास बाधित होता है

वह कहते हैं,"गंदा पानी पीने से बच्चे को डायरिया हो जाता है जिसका विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है. क्योंकि बचपन में बार बार बीमार पड़ना आपके विकास को प्रभावित कर सकता है".

डॉ डेंगोर ने कहा, “गंदे पानी, डायरिया और विकास के बीच संबंध पूरी तरह समझ आता है लेकिन मज़ेदार बात यह है कि इसे पहले दर्शाया नहीं गया.”

वह कहते हैं, “आधा सेंटीमीटर बहुत ज़्यादा नहीं लगता लेकिन हमारा अनुमान है कि यह वृद्धि बौनेपन में 15% तक कमी ला सकती है और यह बहुत महत्वपूर्ण है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन में स्वास्थ्य और विकास के लिए पोषण के निदेशक डॉ फ्रांसेस्को ब्रांका कहते हैं, “इस विश्लेषण से पता चलता है कि इस क्षेत्र में कई तरह से दिशा में काम करने की ज़रूरत है. दीर्घकालिक कुपोषण के अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा को बढ़ाने, क्लिक करें बच्चों के खाने और देखरेख के साथ ही संक्रमणों का इलाज करने घरों का माहौल बेहतर बनाने पर साथ-साथ काम करने की ज़रूरत है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लंबाई बढ़ने की कमी या बौनेपन से दुनिया भर में 16.5 करोड़ बच्चे प्रभावित हैं. इससे मौत और जवानी में उत्पादकता में कमी का ख़तरा बढ़ जाता है.

हर साल अल्पपोषण की वजह से 30 लाख से ज़्यादा मौत होती हैं. यह आंकड़ा पांच साल से पहले मरने वाले बच्चों की संख्या का आधा है.

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