सूरज की सतह पर सूनामी सी हलचल

  • 14 जुलाई 2013
सूर्य की सतह
सूर्य की सतह पर होने वाली हलचलों पर वैज्ञानिकों की हमेशा से नजर रही है.

अंतरिक्ष में मौजूद दो उपग्रहों ने सूरज की सतह पर सूनामी सी हलचल का पता लगाया है.

सूर्य की सतह पर हो रहे विस्फोटों से पैदा होने वाली सौर हवाओं का प्रसार अंतरिक्ष में होते हुए देखा गया है. इसे 'कोरोनल मास इंजेक्शन' या 'सीएमई' भी कहा जाता है.

तस्वीरें: सूरज की सतह पर हलचल

ये सौर हवाएँ सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र के प्रभाव को और अधिक बढ़ा रही हैं. इसके साथ ही गर्म एवं विद्युतीय रूप से आवेशित (आयोनाइज़्ड) गैसों का प्रसार 400 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से हो रहा है.

इत्तेफ़ाक़ से देखी गई इन सौर हलचलों का विश्लेषण 'सोलर फ़िज़िक्स' में प्रकाशित किया जाना है. इससे सूरज के 'सीएमई' से दूर के चुम्बकीय प्रभाव वाले क्षेत्र के 'शांत हिस्सों' को मापा जाना है.

माना जा रहा है कि इस क्षेत्र के अध्ययन से पृथ्वी पर 'सीएमई' के पड़ने वाले असर का पता लगाया जा सकता है.

हिनोडे उपग्रह

इसका श्रेय हिनोडे नाम के उपग्रह को दिया गया है. हिनोडे उन दो उपग्रहों में से एक है जिसने सौर हलचलों से संबंधित ये आँकड़ें इकठ्ठे किए थे.

सूर्य के चारों ओर मौजूद वलयाकार आकृति या कोरोना इसकी सतह से अधिक गर्म रहता है. वैज्ञानिकों के लिए यह तथ्य 70 सालों से एक रहस्य बना हुआ है.

इस प्रगति के बाद अनुसंधानकर्ता का कहना है कि इस रहस्य का पता लगाना अब संभव हो पाएगा.

जापानी उपग्रह हिनोडे साल 2006 से ही सूर्य का अध्ययन कर रहा है. यह 2010 में 'सोलर डायनमिक्स ऑब्जर्वेट्री' की सहायता से पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था.

दोनों ही उपग्रह सूर्य से निकलनेवाली पराबैंगनी किरणों का अध्ययन कर रहे हैं.

हालांकि इन रंगों को आँखों से देखा नहीं जा सकता लेकिन सूर्य की हलचल भरी सतह के पास की परिस्थितियों और वहाँ होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े संकेत प्राप्त हुए हैं.

चुम्बकीय प्रभाव

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ लंदन के डेविड लांग और उनके सहयोगियों ने आख़िरकार उन ईआईटी तरंगों को पकड़ ही लिया जो सीएमई के बाद निकलते हैं.

तस्वीरें: सूरज के अनदेखे रंग

यह किसी भूकंप सरीखी घटना के बाद उठने वाले सूनामी जैसे तूफ़ान की तरह है.

ईआईटी तरंगें उच्च दबाव वाली तरंगें हैं जिनमें ऊष्मा एवं चुम्बकीय प्रभाव रहता है.

इसके अलावा इनमें विद्युतीय आवेशित 'प्लाज़्मा' का भी अवशेष पाया गया है.

डॉक्टर लॉन्ग ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "ये ईआईटी तरंगें बेहद पेचीदा क़िस्म की हैं. ये अनियमित क़िस्म की हैं और कभी-कभार ही होती हैं. ज़रूरत इस बात की थी कि हम सही वक़्त पर सही जगह पर रहें. यह बहुत लंबे समय के बाद हुआ है."

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