ऑस्ट्रेलिया की ‘तैराकी टीम में नशेड़ी’

  • 19 फरवरी 2013
ओलंपिक तैराकी
ऑस्ट्रेलिया ने लंदन ओलंपिक में सिर्फ महिलाओं की 4 x 100मीटर फ्रीस्टाइल रिले प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था.

ऑस्ट्रेलिया में एक सरकारी रिपोर्ट में लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले ऑस्ट्रेलियाई तैराकों की टीम पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. कई खिलाड़ियों पर नशा करने के आरोप भी लगे हैं.

पिछले साल ओलंपिक के दौरान ऑस्ट्रेलियाई तैराकों का प्रदर्शन दो दशकों में सबसे खराब रहा. इसके बाद एक सरकारी खेल संस्था ने पूरे मामले की समीक्षा की.

रिपोर्ट में कहा गया कि तैराकों की टीम में मानक और अनुशासन का स्तर बहुत ही लचर रहा और ‘धौंसबाजी’ से जुड़ी घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया.

समीक्षा में कहा गया कि इस चलन को दूर करने के लिए मजबूत नेतृत्व की जरूरत है.

लंदन ओलंपिक में ऑस्ट्रेलियाई तैराकों ने सिर्फ एक स्वर्ण पदक ही जीता, जो इससे पहले के ओलंपिक खेलों में उसके प्रदर्शन के मुकाबले बहुत कम है.

खेल में खलबली

रिपोर्ट में कहा गया है, “खिलाड़ियों ने बताया कि पदक जीतने के लिए प्रबंधन की तरफ से प्रोत्साहन, संचार और तालमेल कहीं खो सा गया था.”

इसके अनुसार, “स्वर्ण पदक पर बहुत ज्यादा जोर था” और ओलंपिक खेलों में उम्मीद के अनुसार पदक न मिल पाने के बाद अब मनोबल गिरा हुआ है.

रिपोर्ट कहती है, “तैराकों ने इन खेलों को तन्हा ओलंपिक और व्यक्तिगत ओलंपिक करार दिया.”

इसमें आगे कहा गया है, “पूरी टीम के सदस्यों के बीच नशे के ऐसे मामले पाए गए जहां अनुबंधों का उल्लंघन हुआ (जैसे कि शराब पीना, निर्धारित दवाओं का दुरुपयोग, नियमों का उल्लंघन, छल और धौंसबाजी). इसके लिए सामूहिक नेतृत्व की तरफ से कदम उठाने जाने जाहिए थे, जो नहीं उठाए गए.”

इसी महीने पहले ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें वहां कई खेलों में डोपिंग की बात कही गई है, लेकिन ये मामले ज्यादातर ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल और रग्बी लीग से जुड़े हैं.

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