कौन ज़्यादा जीता है, मोटा या पतला?

  • 6 जनवरी 2013
मोटापा
मोटापे पर हुए अध्ययन पर छिड़ा विवाद

अमरीका में किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि मोटे लोग ज्यादा लंबा जीवन जीते हैं.

लेकिन इस अध्ययन से काफी विवाद पैदा हो गया है. मोटापे को समझने वाले जानकार इस अध्ययन से इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

इनमें से कुछ लोगों ने इस अध्ययन को कोरी बकवास करार दिया है तो कुछ का मानना है कि ये अध्ययन भयानक संदेश देगा.

यह शोध 'अमरीकन मेडिकल एसोसिएशन' के जर्नल में छपा है.

रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक वज़नदार लोग स्वस्थ लोगों की तुलना में ज्यादा दिनों तक जीते हैं.

अमरीका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सांख्यिकी केंद्र के अध्ययनकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 97 ऐसे शोधों का मूल्यांकन किया जिसमें 29 लाख लोगों की मृत्यु-दर जानने के लिए 'बीएमआई' पद्धति उपयोग में लाई गई थी.

'बीएमआई' वह पद्धति है जिसमें ये बताया जाता है कि किसी व्यक्ति का वज़न उसकी लंबाई की तुलना में ठीक है या नहीं.

इस पद्धति के मुताबिक 18.5 से लेकर 25 की अनुपात वाले लोगों को सामान्य भार का व्यक्ति माना जाता है.

जबकि जिस व्यक्ति का भार और लंबाई का अनुपात 25 से लेकर 30 तक हो, उसे मोटे व्यक्ति की श्रेणी में रखा जाता है.

विवाद

इस रिपोर्ट को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है. ब्रिटेन के 'रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस' ने इस अध्ययन को दोबारा परखने को कहा है.

यहां के प्रोफेसर जॉन वॉस ने रिपोर्ट पर कई सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है, ''क्या आपने कभी 100 साल के मोटे व्यक्ति को देखा है? शायद आप कहेंगे नहीं.''

उनका कहना है कि ज्यादातर लोगों की काफी पहले मौत हो जाती है और फिर उन्हें मधुमेह की भी शिकायत होने लगती है.

प्रोफेसर जॉन का कहना है कि ऐसे ना जाने कितने उदाहरण हैं जो इस रिपोर्ट के खिलाफ जाते हैं. साथ ही कई दूसरे अध्ययन भी अलग दिशा की तरफ इशारा करते हैं.

इस रिपोर्ट पर अन्य विशेषज्ञों की राय भी ठीक नहीं है. टेक्सास विश्विद्यालय के प्रोफेसर डोनाल्ड बेरी कहते हैं कि जो लोग दुबले होते हैं, वो बीमार पड़ते हैं और बीमार की मौत जल्दी होती है.

संबंधित समाचार