BBC navigation

क्या मसाले सेहत के लिए अच्छे हैं?

 शुक्रवार, 4 जनवरी, 2013 को 19:11 IST तक के समाचार
मसाले

मसालों के सेहत पर असर को लेकर कई तरह की राय सामने आती है

मसालों को हमेशा से ही सेहत के लिए लाभदायक माना जाता रहा है. लेकिन क्या वे शराब की खु़मारी से आपको निज़ात दिला सकते हैं?

आप चाहे किसी भी तरह का भोजन कर रहे हों, चुटकी भर मसाला आपके खाने या पीने को इतना स्वादिष्ट बना देगा कि आप उस पर टूटने से खुद को नहीं रोक पाएंगे.

भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के मुताबिक मसालों की तासीर गर्म या ठंडी हो सकती है और उनका इस्तेमाल पाचन तंत्र में संतुलन के लिए किया जाता है.

भारत के मैसूर स्थित केन्द्रीय खाद्य तकनीक अनुसंधान संस्थान में वैज्ञानिक डॉक्टर कृष्णापूरा श्रीनिवासन कहते हैं, “मसाले पाचन तंत्र के लिए उद्दीपक का काम करते हैं, पेट की बीमारियों में गुणकारी हैं और कुछ मसाले एंटीसेप्टिक यानि रोगाणु रोधक का काम भी करते हैं.”

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि मसालों को आज डाइटिंग (संतुलित आहार) से जोड़कर देखा जा रहा है. आज से लगभग 2500 वर्ष पहले चीन के मशहूर दार्शनिक कनफ्यूशियस ने कहा था कि हर बार भोजन के साथ अदरक लेने से पाचन में सुधार आता है. लेकिन अब भी इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि मसाले किस तरह हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं.

मसालों पर अध्ययन

ब्रिटिश डाइटिक एसोसिएशन की पुरस्कार विजेता आहार विशेषज्ञ अजमीना गोविंदजी का कहना है, “यह एक आम धारणा है कि मसाले डाइटिंग के लिए अच्छे होते हैं क्योंकि मीडिया में अक्सर इस बात का उल्लेख होता रहता है. महिलाएं हर उस बात को गांठ बांध लेती हैं जो उन्हें वज़न कम करने का सबसे आसान तरीका लगता है.”

"ऐसा माना जाता है कि तेज़ लाल मिर्च वज़न को नियंत्रित रखने में मददगार है खासकर ऐसे लोगों में जो सामान्य तौर पर लाल मिर्च नहीं खाते हैं."

अज़मीना गोविंद

अमरीका के उत्तरी कैरोलाइना राज्य में स्थित ऐप्लाचियन स्टेट यूनिवर्सिटी की ह्यूमन परफॉरमेंस लैब के वैज्ञानिकों ने हाल में इस बात का अध्ययन किया कि 40-72 आयुवर्ग की अधिक वज़नी महिलाओं को लाल मिर्च और हल्दी युक्त भोजन लेने से पेट की जलन में राहत मिलती है या नहीं.

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अधिक वज़नी लोगों में पेट में जलन की समस्या पाचन प्रणाली में अत्यधिक दबाव के कारण हो सकती है. यह ऐसी प्रक्रिया है जब रासायनिक तौर पर सक्रिय अवयव शरीर के भीतर की प्रणालियों को उत्तेजित करते हैं और ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं.

लेकिन एक महीने तक चले क्लीनिक ट्रायल का परिणाम नकारात्मक रहा. इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे साबित हो कि लाल मिर्च या हल्दी से पेट की जलन कम करने में कोई मदद मिलती है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात को साबित करने के लिए मसाले की मात्रा बढ़ाकर परीक्षण की ज़रूरत हो सकती है. या फिर इस बात को मान लिया जाए कि मसालों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

लाल मिर्च का कमाल

तेज़ लाल मिर्च को वज़न घटाने वाले मसाले के तौर पर जाना जाता है. हो सकता है कि आपने तले हुए अंडे या फिर भुट्टे में इसे मिलाया हो लेकिन इसे मैपल सीरप के साथ मिलाकर खाने के बारे में क्या विचार है?

मिर्च

लाल मिर्च

तेज़ लाल मिर्च और मैपल सीरप से मिलकर बना मिश्रण 2007 में उस समय सुर्ख़ियों में आया था जब यह दावा किया गया था कि अमरीकी गायिका बेयोंसे नोल्स ने इसका इस्तेमाल करते हुए दो सप्ताह में नौ किलो वज़न कम किया था.

क्यों मसालों को वज़न घटाने का आसान तरीक़ा माना जाता है?

अज़मीना गोविंदजी कहती हैं,“ऐसा माना जाता है कि तेज़ लाल मिर्च वज़न को नियंत्रित रखने में मददगार है खासकर ऐसे लोगों में जो सामान्य तौर पर लाल मिर्च नहीं खाते हैं. लेकिन इसकी पुष्टि होना अभी बाक़ी है.”

अमरीका के इंडियाना राज्य के परड्यू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पाचन और भूख को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया थर्मोजेनेसिस पर लाल मिर्च के प्रभावों का अध्ययन किया.

इस अध्ययन में यह पाया गया कि जैसे-जैसे शरीर का तापमान बढ़ता है वैसे-वैसे पाचन की दर भी बढ़ती है और लाल मिर्च खाने वाले लोगों में मोटापा बढ़ाने वाला भोजन लेने की इच्छा कम हो जाती है.

जापान के क्योटो विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि खाने में लाल मिर्च का इस्तेमाल करने वाले पुरुषों के शरीर में दो सप्ताह बाद वसा की मात्रा में थोड़ा कमी आई और उनका वज़न भी कम हुआ.

दावा करना मुश्किल

लेकिन सवाल ये है कि क्या इन अध्ययनों से कोई वास्तविक निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

"हर कोई कहता है कि भारतीय खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है लेकिन ‘इंडियन सुपरस्पाइसेज’ से मैंने इस धारणा को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है क्योंकि भारतीय व्यंजन दवाई का काम भी कर सकते हैं"

गुरप्रीत बैंस, शेफ़

अजमीना गोविंदजी मानती हैं कि मसालों पर होने वाले अध्ययन बेहद दिलचस्प हैं लेकिन अभी इतने शोध नहीं हुए हैं कि हम निश्चित तौर पर कोई दावा कर सकें.

उन्होंने कहा, “हम जानते है कि नमक की मात्रा कम करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. इससे उच्च रक्तचाप और दिल के दौरे के जोख़िम को कम किया जा सकता है और मसाले खाने में सोडियम की मात्रा कम करने तथा स्वाद बढ़ाने में मददगार है.”

शेफ गुरप्रीत बैंस इस बात के प्रबल पक्षधर हैं कि मसाले हमारे भोजन और स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी हैं.

आम बीमारियों के इलाज में काम आने वाले व्यंजनों के बारे में जानकारी देने वाली ‘इंडियन सुपरस्पाइसेज’ के लेखक बैंस ने कहा कि मसाले इस धरती पर खाना पचाने में सहायक कुदरत की सबसे सशक्त नेमत है.

उन्होंने कहा, “हर कोई कहता है कि भारतीय खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है लेकिन ‘इंडियन सुपरस्पाइसेज’ से मैंने इस धारणा को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है क्योंकि भारतीय व्यंजन दवाई का काम भी कर सकते हैं.”

हैंगओवर भगाने के लिए बैंस कहते हैं कि चाय में नाइजेल सीड्स, सौंफ, इलायची और पिसा हुआ अदरक डालकर पीजिए. हालांकि मसालों के फायदों को लेकर सब एकमत नहीं हैं.

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.