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बंद होंगे याहू के पब्लिक चैट रुम

 मंगलवार, 4 दिसंबर, 2012 को 09:51 IST तक के समाचार
याहू का मुख्यालय

याहू अपनी लोकप्रिय चैट रुम फ़ीचर को बंद कर रहा है.

आप में से बहुतों से याहू पब्लिक चैट में नए-नए दोस्त बनाए होंगे. याहू मैसेज की ये सेवा अब बंद हो रही है. याहू कंपनी ने कहा है कि वे पब्लिक चैट को स्थाई रूप से बंद कर रही है.

याहू के मशहूर ‘चैट रूम’ साल 2005 में उस समय विवादों में आना शुरू हो गए थे जब कंपनियों ने अपने विज्ञापन देने बंद कर दिए थे. इसकी वजह सेक्स संबंधी अवैध चैट रुमों का याहू पर मौजूद होना माना गया था.

लेकिन याहू कंपनी की ओर से आए ब्लॉग में लिखा गया है कि ये सेवा अब वेबसाइट के इस्तेमाल करने वालों के लिए पर्याप्त लाभ नहीं पहुंचा रही है.

याहू चैट रुम 14 दिसंबर से गायब हो जाएंगे और इन्हीं से संबंधित कुछ अन्य फ़ीचर जनवरी के अंत तक हटा दिए जाएंगे.

याहू ने अपने ब्लॉग में लिखा है, “कभी-कभी हमें सख़्त फ़ैसले लेने होते हैं. ऐसा करने से हम उन चीज़ों पर ऊर्जा ख़र्च कर सकते हैं जिनसे यूज़र्स को हमारी वेबसाइट पर अच्छा अहसास.”

कम उम्र लड़कियां

याहू मैसेंजर को 1998 में लांच किया गया था. लेकिन साल 2005 के आते-आते ये सेवा विवादों में गिरने लगी थी.

इसी साल याहू ने इस मैसेंजर के कई पब्लिक चैट रूमों को बंद कर दिया था.

याहू वेबसाइट का एक पन्ना

याहू के पब्लिक चैट रूमों सेक्स संबंधी चैट से विज्ञापन देने वाले भी दुखी थे. साल 2005 में कुछ चैट रुम बंद किए गए थे.

बंद किए जाने वाले चैट रुम थे– तेरह साल की लड़कियां जो अपने से ज़्यादा के उम्र वालों के लिए तैयार हैं, लड़कियां उम्रदराज़ मर्दों के लिए और 8 से 12 साल की लड़कियां उम्रदराज़ मर्दों के लिए.

इन्हें बंद करते वक्त याहू ने घोषणा की थी वे अब सिर्फ़ 18 वर्ष या उससे अधिक के व्यक्तियों को ही अपने मैसेंजर का प्रयोग करने देंगे.

अकेला नहीं है याहू

ऑनलाइट चैट सेवा देने वाली अन्य वेबसाइट्स भी सेक्स स्कैंडलों में फंसी रही हैं.

इसी वर्ष जून में हब्बो होटेल नाम की बच्चों पर केंद्रित लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग को अस्थाई रुप से बंद कर दिया गया था. इस वेबसाइट के बारे में कहा जा रहा था कि इसका प्रयोग बाल यौन शोषण के लिए किया जा रहा है.

ब्रिटेन के चैनल 4 ने दो महीने तक चली अपनी एक खोजी ख़बर में दिखाया कि कैसे इस वेबसाइट पर लॉग इन करने के तुरंत बाद सेक्स के बारे में खुलमखुल्ला बातचीत जारी हो जाती है.

बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्डनेट ने बीबीसी को बताया, “हमारा तो यही संदेश कि बच्चों को पता हो कि कैसे सुरक्षित रहा जाए. ”

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