'हवा से फैलता है' घातक इबोला संक्रमण

  • 27 नवंबर 2012
सुआरों से फैलता है इबोला
सूअरों से भी ये वायरस फैलता है

कनाडा के वैज्ञानिकों का कहना है कि बेहद घातक समझा जाने वाला इबोला वायरस हवा के जरिए भी फैलता है.

अपने प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने साबित किया कि ये वायरस किसी प्रत्यक्ष संपर्क के बिना ही सूअरों से बंदरों में फैल गया.

इस वायरस के कारण इंसानों और नर वानरों में वायरल हेमरैजिक फीवर होता है, जो बेहद घातक है.

शोधकर्ताओं के अनुसार हवा के जरिए होने वाले सीमित फैलाव से ही अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तेजी से बीमारी फैल सकती है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि मुख्यतः सूअरों से ये घातक संक्रमण फैल सकता है. इस शोध के नतीजे ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं.

कैसे फैलता है संक्रमण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अनुसार इंसानों में ये संक्रमण चिंपांजी, गोरिल्ला और जंगली हिरणों जैसे कई जीवों के खून, स्राव, अंगों और शरीर से निकलने वाले द्रव्यों के निकट संपर्क में आने से होता है.

कनाडा की खाद्य निरीक्षण एजेंसी और देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के शोध से पता चलता है कि इबोला से संक्रमित सूअर बिना किसी संपर्क के मैकाक्यू बंदरों में इस बीमारी को फैला सकते हैं.

प्रयोग के दौरान इबोला से संक्रमित सूअरों को एक बाड़े में बंदरों के साथ रखा गया लेकिन उनके बीच में तारों का एक अवरोध भी खड़ा किया गया. आठ दिन बाद कुछ बंदरों में इबोला के लक्षण दिखाई दिए.

एक संभावना ये हो सकती है कि सांस लेते समय सूअरों की छोड़ी गई छोटी छोटी बूंदें हवा के माध्यम से बंदरों के सांस लेते समय उनके अंदर चली गई हों.

इस शोध से जुड़े डॉ. गैरी कॉबिंगर ने बीबीसी को बताया, “हमें ये संदेह है कि बड़ी संख्या में ये बूंदें छोड़ी गईं. वे हवा में रह सकती हैं लेकिन ज्यादा समय के लिए नहीं. हवा उन्हें सोख सकती है और इस तरह ये संक्रमण शुरू होता है, ऐसा हम सोचते हैं, क्योंकि हमें बहुत से नर वानरों के फेंफड़ों में ये वायरस मिला.”

अभी और शोध जरूरी

इबोला बेहद घातक वायरस है जो अधिकतर मामलों में जानलेवा होता है

इस शोध रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि इस वायरस को फैलाने में जंगली और घरेलू सूअरों की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए अभी और काम किया जाना बाकी है.

कई बार ऐसी बातें सुनने को भी मिलती हैं कि इंसानों में ये संक्रमण फैलने से पहले सूअरों की मौत होती है.

डॉ. कोबिंगर का कहना है कि अगर इसमें सूअरों की भूमिका है तो इससे इस वायरस को रोकने में मदद मिल सकती है.

उनके अनुसार सूअरों को इबोला रोधी टीके लगाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है.

इस वक्त युगांडा की राजधानी कंपाला के पास इबोला के कारण कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है. पिछले महीने युगांडा ने खुद को इबोला मुक्त घोषित किया. लेकिन इससे पहले वहां ये संक्रमण कम से कम 16 लोगों की जान ले चुका था.

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