समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी

  • 21 नवंबर 2012
हर साल डेढ़ करोड़ बच्चे अपरिपक्व पैदा होते हैं.

दुनियाभर में अपरिपक्व यानि प्री-मेच्चोर बेबी की संख्या लगातार बढ़ रही है. विकसित देशों में हर साल करीब एक करोड़ 50 लाख बच्चों का जन्म समय पूर्व होता है या कराया जाता है और हर साल करीब 11 लाख अपरिपक्व बच्चों की मौत हो जाती है.

बच्चों का असमय जन्म पांच साल के भीतर होने वाली मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह मानी जाती है.

आंकड़ा चौकाने वाले इसलिए भी हैं क्योंकि, चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अगर अपरिपक्व बच्चों के जन्म पर जल्दी रोक नहीं लगी तो कम उम्र में बच्चों की मौत को रोकना मुश्किल हो जाएगा.

इन विशेषज्ञों ने इस मसले पर और अधिक शोध की भी जरूरत बताई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि 37 सप्ताह जो कि मानव बच्चों के जन्म का परिपक्व सप्ताह होता है. जिन बच्चों का जन्म जल्दी होता उनकी मौत की जोखिम बढ़ जाती है.

'आईवीएफ' है खतरनाक

39 विकसित देशों पर किए गए शोध के बाद इन विशेषज्ञों ने पाया है कि इन देशों में ‘आईवीएफ’ यानि इन-विट्रो फर्टीलाइजेशन की मदद से जो बच्चे पैदा किए जाते हैं उसके कारण भी नवजात बच्चों की जल्दी मौत होती है.

डॉक्टरों की सलाह है कि आईवीएफ के माध्यम से एक ही बच्चे को जन्म देना चाहिए.

यहां तक कि विकसित देशों में पूरे समय से कुछ ही कम पहले हुए बच्चे भी सही देख रेख के अभाव में मौत के शिकार हो जाते हैं.

चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन और ‘लंदन स्कूल ऑफ हाइजिन एंड ट्रॉपिकल मेडिसीन’ के बाल विशेषज्ञ इस मामले को काफी संजीदगी से ले रही है.

दोनों संगठन इस बात पर माथापच्ची करने में जुटे हैं कि विकसित देशों में बच्चों की मौत के इस बढ़ते ग्राफ को कैसे कम किया जाए.

विशेषज्ञों ने मौत के इस बढ़ते आंकड़े पर अंकुश लगाने के लिए कुछ मार्गदर्शन तय किए हैं.

जिनमें, आईवीएफ के माध्यम से एक बच्चे के जन्म को प्रोत्साहित करने, ऑपरेशन के ज़रिए बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया को कम करने, खासतौर से जन्म की सही तारीख से पहले कराए जाने वाली सर्जरी से बचने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा नशे पर रोक लगा कर भी इस पर काबू पाया जा सकता है.

विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करके कम से कम 58 हजार बच्चे के समय पूर्व जन्म को रोका जा सकता है.

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