बताइए आपके बर्गर में क्या है !

 रविवार, 28 अक्तूबर, 2012 को 12:44 IST तक के समाचार

अमरीका में युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है मोटापा

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बर्गर में ऐसा क्या है जो आपका मन उसे बार-बार खाने के लिए करता है.

अमरीका में तंबाकू के खिलाफ़ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले डॉन बैरेट ने भी अपने साथी वकीलों के साथ मिलकर इस तरह के सवालों के जवाब जानने के लिए अमरीका में खाद्य कंपनियों के खिलाफ़ मुकदमा ठोंका है.

अमरीका की बड़ी तंबाकू कंपनियों को आड़े हाथों लेने के बाद अब वकील डॉन बैरेट और उनके साथियों ने खाद्य उद्योग पर निशाना साधा है.

अमरीका के युवाओं में तेजी से मोटापा बढ़ रहा है, जिसका कारण ग़लत खाद्य उत्पाद का सेवन करना बताया जा रहा है.

तंबाकू उद्योगपतियों के साथ 10 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद तंबाकू उद्योगपतियों ने ये स्वीकार किया था कि सिगरेट व्यसनकारी यानी लत लगाने वाली वस्तु है.

बैरेट की इस लंबी लड़ाई का ही परिणाम था कि तंबाकू पीड़ितों को उद्योगपतियों ने 200 अरब डॉलर का मुआवजा देना पड़ा था.

न्यूज़ नाइट की विज्ञान संपादक सुज़न वॉट्स ने जब बैरेट से पूछा कि आखिर उन्होंने इस तरह की लड़ाई ही क्यों चुनी तो उनका कहना था कि इस बहाने वो लोगों की मदद कर पाते हैं.

निशाने पर खाद्य उद्योग

बैरेट की नज़र अब खाद्य उद्यमियों पर है. बैरेट समेत तकरीबन दर्जन भर वकीलों ने अमरीका के बड़े खाद्य उद्यमियों पर मुकदमा ठोंका है.

"बिग फूड अपने उत्पाद के बारे में लोगों को सही जानकारी नहीं देती. उत्पाद को प्राकृतिक और स्वास्थयपरक बता कर बेचती है, जबकि सच्चाई ये है कि इन उत्पादों में ऐसा कुछ नहीं है""

डोन बैरेट, वकील

खुद बैरेट ने ‘बिग फूड’ के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है. बैरेट का कहना है कि “बिग फूड कंपनी अपने उत्पाद के बारे में लोगों को सही जानकारी नहीं देती. उत्पाद को प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक बता कर बेचती है, जबकि सच्चाई ये है कि इन उत्पादों में ऐसा कुछ नहीं है" .”

बैरेट के मुताबिक अमरीका में 25 फीसदी उत्पाद ऐसे हैं जिसके ब्रैंड को लेकर सही जानकारी नहीं होती.

विज्ञान कहता है कि स्वादिष्ट भोजन में शक्कर, नमक और चर्बी की मात्रा काफी होती है जो दिमाग की स्थितियों को बदलती है और संतुष्टि के लिए हमें बार-बार खाने की इच्छा होती है.

बैरेट के मुताबिक अमरीका में खाद्य सामग्रियों पर निगरानी रखने वाली संस्था खाद्य एवं औषधि प्रबंधन (एफडीए) के जो नियामक हैं वो भी नाकाफी है.

उनका कहना है कि इन कंपंनियों को सिर्फ चेतावनी पत्र लिख देना ही पर्याप्त नहीं है.

बैरेट कहते हैं, “ये कोई नहीं बताता कि लोग क्या खा सकते हैं और क्या नहीं खा सकते. अगर खाद्य कंपनियां अपने उत्पाद के बारे में सच बताना शुरू कर दें तो लोग खुद अपने खाने का निर्णय ले सकते हैं कि उन्हें किस चीज से बचना चाहिए और क्या खाना उपयुक्त रहेगा. ये कानून की दरकार भी है.”

बैरेट इस मामले को भी तंबाकू मुकदमे से जोड़ कर देखते हैं. उनका कहना है कि अमरीका के लोग ऐसा मान कर चलते हैं कि जिस उत्पाद को बेचने के लिए कानून की तरफ से हरी झंडी मिल गई वो ठीक ही होगी. सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए.

दरअसल, अमरीका के युवाओं में वजन बढ़ने और मोटापे की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है. अमरीका की रोग नियंत्रक केंद्र (सीडीसी) के आंकड़ों के मुताबिक अमरीका में 20 वर्ष के करीब दो तिहाई अमरीकी मोटापे और बढ़ते वजन से परेशान हैं. जो कहीं ना कहीं खतरे की घंटी है.

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