दान किए शुक्राणुओं से बच्चों को मिली बीमारियां

  • 30 सितंबर 2012
शुक्राणु
आनुवांशिक विकास से इन बच्चों में दृष्टिहीनता और मिरगी हो सकती है

डेनमार्क के एक व्यक्ति के दान किए शुक्राणुओं से पैदा 43 बच्चों में कम से कम पांच बच्चे गंभीर आनुवांशिक बीमारी का शिकार पाए गए हैं.

इन पांच बच्चों में आनुवांशिक विकार की वजह से अब दृष्टिहीनता और मिर्गी की बीमारी की आशंका बढ़ गई है.

कोपेनहेगेन के जिस नॉरडिक्स क्रायोबैंक क्लिनिक के जरिए इस व्यक्ति ने मुख्यतः अपने शुक्राणु दान दिए, उसकी खास तौर से आलोचना हो रही है कि उसने ठीक से जांच पड़ताल क्यों नहीं की और अस्वस्थ शुक्राणु का इस्तेमाल होने से क्यों नहीं रोका.

हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि इस शुक्राणु दाता का स्क्रीनिंग टेस्ट भी हुआ था लेकिन उनमें इन बीमारियों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया था.

ये मामला सामने आने के बाद डेनमार्क में स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्राणु दान करने को लेकर तय किए क़ानून को और सख्त कर दिए हैं.

दस देशों में दान

क्लिनिक के महानिदेशक पीटर बॉवर ने बताया, ''हम ये जानते है कि इन पांच बच्चों में ये आनुवांशिक विकार शुक्राणु दाता से आया है."

उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2009 से पहले इस व्यक्ति ने यूरोप के अंदर और बाहर के दस देशों में शुक्राणुओं का दान किया था.

बॉवर के मुताबिक वो गोपनीयता नियम के कारण इन बच्चों के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं.

डेनमार्क के सरकारी रेडियो स्टेशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि इस व्यक्ति ने 14 क्लिनिकों में शुक्राणु दिए है और वो 43 बच्चों के पिता हैं.

डेनमार्क में शुक्राणु दान के लिए नियम आसान हैं, इसलिए कृत्रिम गर्भधारण के लिए वो बड़ा केंद्र बन गया है.

एक व्यक्ति के दान किए शुक्राणुओं से अधिकतम 25 बच्चों के जन्म की ही अनुमति है. लेकिन इस मामले में एक व्यक्ति के शुक्राणुओं से 43 बच्चों का जन्म हुआ जो नियमों का उल्लंघन है.