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कंप्यूटर कर रहे हैं आपकी नौकरी का फैसला

 रविवार, 9 सितंबर, 2012 को 19:59 IST तक के समाचार
ऑनलाइन मिलेगी नौकरी

लोगों की भीड़ में संभवित कर्मचारियों को चुन रहे हैं सॉफ्टवेयर.

खिली हुई धूप में एक नौजवान पार्क में बेंच पर बैठा है. फिर एक चिड़िया उड़ती हुई निकलती है और पेड़ से एक पत्ती गिरती है.

लेकिन तभी एक साथ बहुत सी बातें होती हैं. एक दोस्त उस युवक को छुट्टी में कहीं चलने को कहता है, एक दोस्त उसे एक कॉफी शॉप में नौकरी की पेशकश करता है और उसके बाद कई लोग अपने मोबाइल फोन से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए मदद मांगते हैं.

इस परिदृश्य में ये युवक क्या कुछ करता है, उसी से तय होगा कि उसे नौकरी मिलनी चाहिए या फिर वो पार्क की बेंच पर ही बैठा रहेगा.

हालांकि पत्तियां गिरेंगी लेकिन इस युवक को शरद ऋतु की ठंडक का अहसास नहीं होगा क्योंकि ये एक ‘अवतार’ है, एक कार्टून किरदार जो किसी संभावित कर्मचारी की योग्यता का मूल्यांकन करने के लिए तैयार किया गया है.

खुद को ‘टैलेंट कंसलटेंसी’ कहने वाले कैमेस्ट्री ग्रुप नाम की कंपनी ने ये ऑनलाइन गेम तैयार किया है ताकि टेलीकॉम कंपनी ओ2 अपने संभावित कर्मचारियों की योग्यता का विश्लेषण कर सके.

मानवीय स्पर्श

ये सिर्फ इलकौता सॉफ्टवेयर नहीं है जो कंपनियों में लोगों को नौकरी पर रखने की प्रक्रिया में बढ़ते डिजिटल प्रभाव को दिखाता है.

"आमने सामने बैठ कर किए जाने वाले इंटरव्यू दोनों ही पक्षों के लिए बहुत खर्चीले और वक्त लेने वाले होते हैं. अब ऐसे इंटरव्यू नौकरी पर रखने के लिए आखिरी दौर के लिए ही होंगे."

गार्डन व्हाइट, रिक्रूटमेंट कंसलटेंट

एसएचएल नाम की एक कंपनी ने एक ऑनलाइन 3डी प्रोग्राम तैयार किया है जिनमें नौकरी के इच्छुक व्यक्ति के सामने घूरता हुआ एक बॉस प्रकट होता है और कई मुश्किल दुविधा वाली स्थितियों के हल पूछता है.

वहीं एनरिक्रूट एक वीडियो आधारित इंटरव्यू उत्पाद है जो नौकरी के इच्छुक लोगों के सामने ऑनलाइन वेब कैमरे के जरिए सिर्फ तीन सवाल रखता है. इससे नियोक्ता फैसला कर सकता है कि उसे किस व्यक्ति से से मिलना है और किससे नहीं.

बीआईए ग्रुप में रिक्रूटमेंट कंसलटेंट गॉर्डन व्हाइट कहते हैं, “आमने सामने बैठ कर किए जाने वाले इंटरव्यू दोनों ही पक्षों के लिए बहुत खर्चीले और वक्त लेने वाले होते हैं. अब ऐसे इंटरव्यू नौकरी पर रखने के लिए आखिरी दौर के लिए ही होंगे.”

लेकिन वो ये नहीं मानते कि नियोक्ता की संभावित कर्मचारी से मुलाकात की अहमियत पूरी तरह खत्म हो जाएगी.

सीवी की जांच

कंपनियां पहले ही ‘एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम’ इस्तेमाल कर रही हैं जो नौकरी के इच्छुक लोगों के सीवी का विश्लेषण करते हैं.

व्हाइट बताते हैं, “कोई भी अब 500 सीवी नहीं पढ़ता है- अब ये सब काम ऑटोमेटिक होता है.”

वो बताते हैं, “अगर नौकरी के इच्छुक लोगों को पता चल जाए कि कंपनी उनके सीवी की छंटनी के लिए कौन सा टूल इस्तेमाल कर रही हैं तो वो अपना सीवी संभावितों में शामिल कराने के लिए काफी कुछ कर सकते हैं.”

ऑनलाइन मिलेगी नौकरी

सोशल मीडिया आने वाले समय में नौकरी तलाशने में अहम भूमिका अदा करेगा.

वो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए निकले नौकरी के विज्ञापन का जिक्र करते हैं जिसमें ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जिसके पास ‘लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम की बुनियादी जानकारी’ होनी चाहिए.

ऐसे में सॉफ्टवेयर सीवी में ‘लाइनेक्स’, ‘बुनियादी’ और ‘अनुभव’ को एक साथ तलाशेगा.

लेकिन सॉफ्टवेयर के लिए सीवी में दी गई झूठी जानकारियों को पकड़ना मुश्किल होगा.

सॉफ्टवेयर कंपनी 'नॉर्थगेट-एरिनसो पीपल चेकिंग' का कहना है कि 71 प्रतिशत नियोक्ताओं को सीवी पर झूठी जानकारियों के मामले मिले हैं.

डिजिटल दुनिया के भावी परिदृश्य में दिलचस्पी रखने वाले माइक रयान का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के नियमों और मनोविज्ञान के तालमेल से ही आगे तय होगा कि नौकरी का इच्छुक कोई व्यक्ति कितना आत्मविश्वासी है.

सोशल मीडिया

लोगों को नौकरी पर रखने की प्रक्रिया में मानवीय संपर्क लगातार घटता जा रहा है लेकिन बहुत सी कंपनियों को उम्मीद है कि डिजिटल दुनिया की बदौलत आगे चल कर संभावित कर्मचारियों से उनके संबंध काफी समृद्ध होंगे.

"लिंक्डइन, फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया वेबसाइटें नियोक्ताओं को संभावित कर्मचारियों के टैलेंट पूल को बेहतर करने का मौका देती हैं."

डैन फिनिगन

जल्द सोशल मीडिया ‘डिजिटल टैंलेंट पूल’ के जरिए लोगों को नौकरी पर रखे जाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका अदा करेगी.

‘सोशल रिक्रूटिंग सॉल्यूशंस’ से जुड़ी कंपनी जॉबवाइट के सीईओ डैन फिनिगन कहते हैं, “लिंक्डइन, फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया वेबसाइटें नियोक्ताओं को संभावित कर्मचारियों के टैलेंट पूल को बेहतर करने का मौका देती हैं. कई कंपनियां अपने मौजूदा कर्मचारियों को इस बात के लिए प्रेरित करती हैं कि वे अपने ऑइनलाइन फ्रेंड्स के साथ अपनी कंपनी में नौकरी के अवसरों की जानकारी साझा करें.”

वो बताते हैं कि ये तरीका तेज और बेहद कम खर्चीला है. लेकिन फिनिगन चेतावनी देते हैं कि इन सोशल मीडिया नेटवर्कों पर कंपनियों के लिए अपने ब्रांड की छवि को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है.

सोशल मीडिया के जरिए भारी मात्रा में आने वाले आवेदनों को संभालना भी एक चुनौती है.

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