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बच्चे ने बनाई कैंसर जांचने की सस्ती प्रणाली

 रविवार, 26 अगस्त, 2012 को 13:30 IST तक के समाचार
कैंसर

जैक को अपने शोध की पुष्टि करवाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी

अमरीका के मेरीलैंड में रहने वाले 15 साल के छात्र जैक एंद्राका के शौक बिल्कुल वैसे हैं जैसा उनकी उम्र के स्कूली छात्रों का होता है.

जैक को कयाक और टीवी शो देखना काफी पसंद है और खाली वक्त में उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कैंसर लैबोरेट्री में शोध करना भी पसंद है.

जैक ने कैंसर की जाँच की एक प्रणाली विकसित की है.

उनका दावा है कि उन्होंने पैनक्रियास के कैंसर की जांच करने वाली जो टेस्ट प्रणाली को तैयार किया है वो अब तक की सभी जांच प्रणालियों से 168 गुना तेज़ और करीब 1000 गुना सस्ता और 400 गुना ज्यादा असरदार है.

उनका कहना है कि इस टेस्ट की कम कीमत से अस्पतालों में इसकी उपलब्धता तो बढ़ेगी ही, गरीब और कम आय वाले मरीज़ भी इसका इस्तेमाल कर पाएंगे.

जैक अब अपने शोधकार्य को अमरीकी शहर बाल्टीमोर के हॉकिंस विश्वविद्यालय में पूरा कर रहे हैं.

गूगल की मदद से

"कैंसर की वजह और उसके सफल इलाज को लेकर मैं इसलिए संजीदा हूं क्योंकि मेरे परिवार में कई लोग पैंन्क्रियाटिक और सामान्य कैंसर से पीड़ित रह चुके हैं और मैंने उनके इलाज के दौरान आई दिक्कतों को नज़दीक से देखा है"

जैक एंद्राका

जैक के अनुसार इस शोध में गूगल से भी काफ़ी मदद मिली है.

जैक ने मई महीने में हुए इंटेल इंटरनेशनल साइंस और इंजीनियरिंग फेयर में 75 हज़ार डॉलर की राशि जीती थी.

जैक कहते हैं कि उन्हें अपने रिसर्च के दौरान गूगल के सर्च इंजिन और ऑनलाइन साइट पर उपलब्ध मुफ्त विज्ञान पत्रिकाओं से काफी मदद मिली.

एंद्राका ने इन विज्ञान पत्रिकाओं का इस्तेमाल कर इस टेस्ट प्रणाली को विकसित करने में सफलता हासिल की है.

उनका कहना है कि उन्हें इसका आईडिया अपनी बायोलॉजी की क्लास के दौरान बस बैठे-बैठे आ गया.

बाद में जब उन्होंने अपनी बायोलॉजी टीचर को इसके बारे में बताया तो वे भी काफी खुश हुईं और जैक को इसपर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया.

आखिर क्यों?

कैंसर

कैंसर की ये जाँच काफ़ी सस्ती होगी

जैक एंद्राका से अक्सर लोग पूछते हैं कि आखिर खेलने- कूदने की उम्र में वो कैंसर जैसी बीमारी के इलाज को लेकर इतने संजीदा क्यों हैं? इस पर कहते हैं, ''कैंसर की वजह और उसके सफल इलाज को लेकर मैं इसलिए संजीदा हूं क्योंकि मेरे परिवार में कई लोग पैंन्क्रियाटिक और सामान्य कैंसर से पीड़ित रह चुके हैं और मैंने उनके इलाज के दौरान आई दिक्कतों को नज़दीक से देखा है.''

उनके शोध को इतनी आसानी से स्वीकार भी नहीं किया गया था.

जैक ने अपने शोधपत्र को कम से कम 200 प्रोफेसरों को भेजा था जिनमें से 199 जगहों से उन्हें निराशा मिली और एक जगह इसे स्वीकार किया गया, जहां पर उन्होंने अपना रिसर्च पूरा किया.

जैक एंद्राका को लगता है कि उनके जैसे छात्रों के लिए जो डॉक्टरी की पढ़ाई नहीं कर रहे हैं पर जिन्हें जीव-विज्ञान के क्षेत्र में खासी रुचि है उनके लिए इंटरनेट एक वरदान के समान है, जिसकी मदद से वो अपना रिसर्च करने में काफी सफल हुए हैं.

न्यूटन के एक लोकप्रिय कथन को याद करते हुए जैक कहते हैं, ''मैं दूसरों के महान कार्यों को देखकर उसे और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा हूं.''

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