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वो 'चर्बी' जिससे आप मोटे नहीं होंगे

 मंगलवार, 31 जुलाई, 2012 को 02:24 IST तक के समाचार

भला वो कौन सी चीज है जो हमारे शरीर के किसी भी अंग की तुलना में 300 गुना ज्यादा गर्मी पैदा करती है? वो क्या है जो जमा देनी वाली सर्दी के हवाले कर दिए गए एक शिशु को मौत के मुंह से बचाती है?

इन दोनों ही सवालों का एक ही जवाब है- 'ब्राउन फैट' यानि भूरी चर्बी.

वैज्ञानिकों ने खोज की है कि इस तरह की चर्बी शरीर के लिए अच्छी है क्योंकि ये कैलोरी को जलाकर काफी तादाद में उष्मा पैदा करती है.

सफेद चर्बी की तरह ये कूल्हों या शरीर के दूसरे हिस्सों में जमा नही होती, बल्कि 'ब्राउन फैट' वजन को घटाने में मददगार होता है.

इसीलिए 'ब्राउन फैट' के बारे में और जानने के लिए वैज्ञानिकों में होड़ मची है ताकि इंसान इसका फायदा उठा सके.

जब हम पैदा होते हैं तो हमारे शरीर में काफी 'ब्राउन फैट' होता है. ये 'ब्राउन फैट' शिशु के मुख्य अंगों को चारों तरफ से घेरे रखता है और उसे गर्मी देता रहता है. जन्म होने पर ये शिशु को बाहरी वातावरण के अनुकूल बनाने में मददगार होता है.

प्रोफेसर माइकल साइमंडस

"गर्दन वाले हिस्से में सिर्फ 50 ग्राम ब्राउन फैट होता है. ये व्यायाम करने और भोजन करने या पूरे दिन अलग-अलग तापामान को संतुलित करते हुए किसी बिजली की तरह ही जलता बुझता रहता है."

लेकिन बड़े होने के साथ-साथ शरीर में 'ब्राउन फैट' की मात्रा कम होती जाती है.

नॉटिंघम विश्विद्यालय के शोधकर्ताओं ने बच्चों और वयस्कों में 'ब्राउन फैट' का पता लगाने के लिए उष्मा तकनीक का सहारा लिया.

गर्दन में गर्मी

'यूनिवर्सिटीज स्कूल ऑफ क्लिनिकल साइंसेज' के प्रोफेसर माइकल साइमंडस और डॉक्टर हेलेन का कहना है कि 'जर्नल ऑफ पीडिएट्रिक्स' में प्रकाशित हुए उनके अनुसंधान से पता चलता है कि स्वस्थ बच्चों के गर्दन वाला हिस्सा गर्मी पैदा करता है.

प्रोफेसर माइकल साइमंडस कहते हैं कि गर्दन वाले हिस्से में सिर्फ 50 ग्राम 'ब्राउन फैट' होता है. ये व्यायाम करने और भोजन करने या पूरे दिन अलग-अलग तापमान को संतुलित करते हुए किसी बिजली की बल्ब की तरह ही जलता बुझता रहता है.

लेकिन ये क्षमता वयस्कों और किशोरों की तुलना में छोटे बच्चों में कहीं ज्यादा होती है.

प्रोफेसर माइकल साइमंडस का कहना है कि अब चुनौती इस बात की है कि इस जानकारी का इस्तेमाल उऩ कारकों को खोजने मे किया जाए जिससे 'ब्राउन फैट' बनता है.

वो कहते हैं कि इससे हमें 'ब्राउन फैट' की भूमिका के बारे में और पता करना है कि कैसे ये भोजन से मिलने वाली ऊर्जा और शरीर द्वारा इस्तेमाल में लाई जाने वाली ऊर्जा के बीच संतुलन करता है.

चित्र में दिखाई दे रहा है कि बच्चे की पीठ (लाल रंग) में 'ब्राउन फैट' से किस तरह उसके अंगों को रक्षा कर रही है

मोटापे से लड़ने का हथियार?

लेकिन सवाल ये भी है कि क्या 'ब्राउन फैट' मोटापे से लड़ने का भी हथियार है?

सब जानते हैं कि ब्रिटेन में वजन बढ़ना एक समस्या है. ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा योजना और सोशल केयर इन्फॉर्म सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक 2010 मे एक चौथाई वयस्क मोटापे से पीड़ित हैं.

"अगर हम ब्राउन फैट के सक्रिय कर सकें तो हम ज्यादा खा सकते हैं और वजन भी नही बढे़गा. "

प्रोफेसर सर स्टीफन ब्लूम

लंदन के इंपीरियल कॉलेज में प्रोफेसर सर स्टीफन ब्लूम कहते हैं, “ये एक अच्छा सिद्धांत है. अगर हम 'ब्राउन फैट' को सक्रिय कर सकें तो हम ज्यादा खा सकते हैं और वजन भी नही बढे़गा. लेकिन हम अनावश्यक रुप से ऊर्जा नष्ट करेंगें, ज्यादा पसीना बहाएंगे और खिड़कियों को हमेशा के लिए खोल कर रखेंगे.”

चूहे, गिलहरी जैसे जानवरों और छोटे स्तनधारियों पर किए गए पुराने शोध में पाया गया था कि वो भी बच्चों की तरह खुद को गरम रखने के लिए इसी 'ब्राउन फैट' का इस्तेमाल करते हैं.

स्टीफन ब्लूम कहते हैं कि शायद ये इंसानों पर लागू न हो, विशेष रुप से वयस्कों पर क्योंकि 'ब्राउन फैट' का उतनी मात्रा में इंसानों में मिलना आम नही है.

इसलिए ये जितना दिखाई देता है उतना आसान नही है. इनके प्रकार अलग-अलग हैं लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि 'ब्राउन फैट' सफेद फैट से बेहतर है.

हांलाकि प्रोफेसर ब्लूम काफी सरकारात्मक होकर कहते हैं कि 'ब्राउन फैट' मोटापे, मधुमेह और दिल की बीमारियों के खिलाफ मददगार हो सकता है लेकिन अभी इस खोज को लंबा रास्ता तय करना बाकी है और इसमें कम से कम एक दशक और लगेगा.

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