रुचि सांघवी: फेसबुक को ऊंचाइयां देने वाली इंजीनियर

 शनिवार, 19 मई, 2012 को 07:49 IST तक के समाचार
रुचि सांघवी

रुचि ने 2005 में फेसबुक से अपने करियर की शुरुआत की

रुचि सांघवी की उम्र 23 साल थी जब वो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक में पहली महिला इंजीनियर बनीं.

रुचि ने फेसबुक के न्यूज फीड को विकसित किया है और उन्होंने इस वेबसाइट को छोटी सी शुरुआत से दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्क बनते देखा है.

सिलिकन वैली कहे जाने वाले अमरीकी आईटी सेक्टर में शानदार कामयाबी हासिल करने वाली रुचि बताती हैं कि जब उन्होंने इंजीनियरिंग करने की सोची तो उन्हें काफी विरोध झेलना पड़ा.

बीबीसी से बातचीत में रुचि ने बताया, “लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या मैं अपनी आस्तीन चढ़ा कर किसी फैक्ट्री में काम करना चाहती हूं.”

रुचि कहती हैं कि एक महिला और एक इंजीनियर होने के नाते उन्हें करियर में आगे बढ़ने में मदद मिली.

'फैसला महिलाओं को करना है'

वो कहती हैं, “इंजीयरिंग को लेकर लोगों की सोच बदली है और हाल के सालों में इस पेशे में काफी विविधता आई है.”

"अब ये कंपनी पहले जैसी नहीं रही. बहुत कुछ बदल गया है. दरअसल हमें तो ये पता ही नहीं था कि हमारी सीमाएं क्या हैं. हमने फैसला किया था कि हम ऐसी जगह बनाएं जहां लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ जुड़ें और बात कर सकें.”"

रुचि सांघवी

भारत में जन्मी रुचि के मुताबिक सिलिकन वैली में अब कंपनियां महिला और पुरूषों को एक जैसी सुविधाएं दे रही हैं ताकि वे काम और निजी जीवन के बीच आसानी से संतुलन कायम कर सकें.

वो मानती हैं कि बच्चों की देखभाल के लिए छुट्टियां, काम की लचीली शिफ्ट और दफ्तर में बच्चों की देखभाल की सुविधाएं खासी फायदेमंद हैं.

लेकिन रुचि का कहना है कि आखिरकार फैसला महिलाओं को ही चुनना पड़ता है कि वो क्या फैसला लेती हैं.

वह कहती हैं, “महिलाओं को ये समझना होगा कि वे काम करती रह सकती हैं. बहुत सी महिलाएं गर्भवती होने से पहले ही पीछे कदम हटाने लग जाती हैं. मेरा मानना ये है कि जब तक आप जिंदगी में अपने अगले कदम के लिए तैयार नहीं हैं, आपको जम कर काम करना चाहिए.”

फेसबुक को नसीहत

फेसबुक के शेयर

शुक्रवार को फेसबुक ने पहली बार बाजार में अपने शेयर उतारे.

फेसबुक में अपने शुरुआती दिनों में रुचि ने अमरीकी शहर पालो अल्टो में एक चीनी रेस्त्रां के ऊपर एक छोटे से दफ्तर में काम किया.

उन्होंने 2005 में जब फेसबुक जॉइन किया था तो ज्यादा नहीं पता था कि आगे क्या होगा.

रुचि ने 2010 में फेबसुक को छोड़ दिया और अपने पति के साथ मिल कर कोव नाम से अपनी खुद की कंपनी स्थापित की. उनके पति ने भी 2005 में इंजीनियरिंग निदेशक के रूप में फेसबुक जॉइन किया था.

फरवरी 2012 में कोव को ड्रोपबॉक्स नाम की कंप्यूटर डेटा शेयरिंग कंपनी ने खरीद दिया और रुचि 30 साल की उम्र में कंपनी की उपाध्यक्ष बन गईं.

फेसबुक अब सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बन गई है तो रुचि उसे कुछ सलाह देना चाहती हैं.

वो कहती हैं कि फेसबुक को 'तेजी के साथ आगे बढ़ने और धारणाओं को तोड़ने' के अपने जज्बे को कायम रखना चाहिए.

उनके मुताबिक, “अब ये कंपनी पहले जैसी नहीं रही. बहुत कुछ बदल गया है. दरअसल हमें तो ये पता ही नहीं था कि हमारी सीमाएं क्या हैं. हमने फैसला किया था कि हम ऐसी जगह बनाएं जहां लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ जुड़ें और बात कर सकें.”

फेसबुक का भविष्य

फेसबुक

दुनिया भर में इस वक्त 90 करोड़ लोग फेसबुक से जुड़े हैं.

रुचि ने दो और इंजीनियरों के साथ मिल कर न्यूज फीड को विकसित किया था. वो बताती हैं कि इसका उद्देश्य एक गतिशील और विशिष्ठ अखबार को साकार करना था.

जब न्यूज फीड को शुरू किया गया था तो फेसबुक इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या एक करोड़ थी. अब दुनिया भर में 90 करोड़ लोग फेसबुक से जुड़े हैं.

क्या कंपनी अपनी इस रफ्तार को बनाए रख सकती है, इस पर रुचि कहती हैं कि फेसबुक सिर्फ दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसा नहीं है. यहां पर लोग एक दूसरे से जुड़ते हैं, वे अपने दोस्तों और परिवारों की परवाह करते हैं. ये कोई अस्थाई प्रोडक्ट नहीं है. ये आपके रिश्ते की तरह है और जुड़ाव अस्थायी नहीं होता.

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