गुआम के लोगों की सांपों से जंग

 शुक्रवार, 11 मई, 2012 को 04:55 IST तक के समाचार
जहरीले सांप

यह जहरीले सांप कई परेशानियां पैदा करते हैं.

अमरीका के गुआम को सांपों का टापू भी कहते हैं. यहां पर हर वर्ग मील में दस हजार से अधिक भूरे रंग के पेड़ पर रहने वाले सांप हैं.

लेकिन यह उपजाति गुआम की नहीं है. कहा जाता है कि पडो़स के एक टापू से यह सांप दूसरे विश्व यूद्ध के कारगो जहाज या विमान में यहां आ पहुंचे. यहां आ कर इन्होंने तबाही मचाई है, लेकिन अब स्थानीय लोगों ने इनके खिलाफ लड़ने का फैसला किया है.

हैलिकॉप्टर से पैराशूट के सहारे ज़हरीले चूहे नीचे छोड़े जा रहे हैं. सांपों ने सोचा भी नहीं होगा कि यह उनकी मौत का खाना है.

लेकिन यह गुआम के भूरे रंग के पेड़ के सांप के खिलाफ जंग में सबसे ताजा हथियार है.

घने, उष्णकटिबंधीय जंगलों के भीतर सांप के सबसे बड़े शिकारी और जीव विज्ञानी जेम्स स्टैनफोर्ड ने बताया कि उन्होंने एक सांप को पकड़ा है.

"कोई नहीं जानता यह कहां से आए हैं. हमारा मानना है कि यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद आए. हमने उनके आनुवांशिकी को देखा तो पता लगा कि इनके एक दूसरे से करीबी संबंध है और ऐसा लगता है कि यह मैनिस के टापू से आए हैं जहां गुआम की बहुत सारी सैन्य सामग्री रखी थी. शायद यह कुछ गिने चुने सांपों से या शायद एक ही गर्भवती महिला सांप से आए होंगे, लेकिन अब यहां इनकी जबरदस्त आबादी है."

जेम्स, जीव विज्ञानी

एक छोटे से टापू पर बीस लाख भूरे रंग के पेड़ पर रहने वाले सांप हैं.

जेम्स ने कहा, ''कोई नहीं जानता यह कहां से आए हैं. हमारा मानना है कि यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद आए. हमने उनके आनुवांशिकी को देखा तो पता लगा कि इनके एक दूसरे से करीबी संबंध है और ऐसा लगता है कि यह मैनिस के टापू से आए हैं जहां गुआम की बहुत सारी सैन्य सामग्री रखी थी. शायद यह कुछ गिने चुने सांपों से या शायद एक ही गर्भवती महिला सांप से आए होंगे, लेकिन अब यहां इनकी जबरदस्त आबादी है.''

यह जहरीले सांप कई परेशानियां पैदा करते हैं.

सांपों का असर

लगभग हर रोज, बिजली की लाइनों पर रेंग रहे यह सांप इस टापू की बिजली व्यवस्था बिगाड़ देते हैं. कई बार लोग सुबह उठते हैं तो इन्हें बिस्तर में पाते हैं.

लेकिन इन्होंने सबसे बड़ा असर वन्यजीव पर डाला है जो खत्म हो गया है.

गुआम के अब मूल पक्षी अब केवल प्रजनन केंद्र के पिंजरों में ही मिलते हैं.

कृषि विभाग के लिए काम करने वाली चेरिल कैलूस्टरो का कहना है, ''हमारे पक्षी परभक्षियों के बिना विकसित हुए थे. फिर सांप आए. पक्षियों की पीढ़ियां ही समाप्त हो गई. उन्होंने अंडे, बच्चे, व्यस्क... सब कुछ खा लिया.''

दूसरों को नहीं मोड़ते

स्थानीय लोग जहां इन सांपो से पीछा छुड़ाना चाहते हैं

एक तरफ स्थानीय लोग जहां इन सांपो से पीछा छुड़ाना चाहते हैं वहीं वह इस समस्या को दूसरों की ओर नहीं मोड़ना चाहते.

गुआम हवाई अड्डे के निकट व्यस्त कारगो डिपो पर एक जैक रसेल कुत्ता एक निर्यात होने वाले बक्से को सूंघ रहा है.

उसे छिपे हुए सांपों को ढूंढ कर बाहर निकाल कर फेंकने के लिए रखा गया है. टापू से बाहर जाने से पहले हर चीज की तलाशी ली जाती है.

इस कार्यक्रम को चलाने वाले डान वाइस कहते हैं, '' अध्ययन करने वालों ने वहां की अर्थव्यवस्था पर सांपों के असर का प्रयोग कर के देखा है. उन्होंने पाया कि इस पर केवल हवाई में 40 करोड़ डॉलर से अधिक खर्च आएगा. खर्च में इंसानों के देखरेख का खर्च शामिल है क्योंकि सांप मनुष्य को काटते हैं. फिर बिजली व्यवस्था पर आने वाला खर्च और पर्यटन से होने वाली आमदनी का नुक्सान.''

इस बीच डॉ स्टैनफोर्ड एक और सांप पकड़ लेते हैं जिससे यह साफ है कि गुआम सांपों से छुटकारा पाने से बहुत दूर है.

फिलहाल गुआम दुनिया के लिए एक उदाहरण है कि कोई आक्रामक प्रजाति अगर हमला करे तो क्या हो सकता है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.