'अग्नि' परीक्षण के बाद 'रीसैट' का सफल प्रक्षेपण

 गुरुवार, 26 अप्रैल, 2012 को 07:03 IST तक के समाचार

ये पीएसएलवी की 20वीं सफल उड़ान है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने रीसैट-1 नाम के उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है.

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया ये उपग्रह यानी सैटेलाइट रीसैट-1 इसरो का अब तक का भारत का सबसे भारी उपग्रह है.

इसे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन यानी पीएसएलवी-सी 19 के ज़रिए गुरूवार की सुबह लगभग पौने छह बजे प्रक्षेपित किया गया.

रिमोट सेंसिग सेटेलाइट

इस उपग्रह का उपयोग आपदाओं की भविष्यवाणी, कृषि और रक्षा क्षेत्र में किया जाएगा. इससे फसलों की पैदावार के बारे में जानने और खासकर आपदा प्रबंधन के वक्त भी काफी मदद मिलेगी.

ये हर तरह के मौसम जैसे घने कोहरे, बादल, तेज गर्मी, चक्रवात, कोहरे में भी तस्वीरें लेने में सक्षम है. इस उपग्रह का कार्यकाल पांच वर्ष का है.

इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने कहा कि ये पीएसएलवी की 20वीं सफल उड़ान है.

मिशन डायरेक्टर ने कहा," हर तरह का अभियान एक चुनौती होता है. हमने इसे सफततापूर्वक कर दिखाया है, अब अगली चुनौती इसी तरह पीएसएलवी-सी 21 को भेजे जाने की है."

रीसैट-1 के तथ्य

  • रीसैट-1 करीब 1,858 किलोग्राम वजन का है.
  • रीसैट-1 की इसके विकास सहित लागत करीब रुपये 378 करोड़ रुपये है.
  • पीएसएलवी-सी 19 के निर्माण में 120 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
  • कुल मिला कर इस मिशन 498 करोड़ रुपये खर्च हुए है.

खराब मौसम के दौरान भारत वर्तमान में कनाडा के एक उपग्रह से ली गई तस्वीरों पर निर्भर है क्योंकि घरेलू रिमोट सेंसिंग अंतरिक्ष यान उस वक्त धरती की तस्वीरें नहीं ले सकते जब आकाश पर घने बादल होते हैं.

प्रक्षेपण वाहन रीसैट-1 उपग्रह को पृथ्वी से ऊपर 480 किमी की कक्षा में 97.552 डिग्री पर स्थापित करेगा. उपग्रह पर मौजूद उपकरण इसे धक्का देकर 536 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतिम रूप से स्थापित कर देंगे.

तीन दिनों बाद ये उपग्रह काम करना शुरु कर देगा.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.