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सूखे अफ्रीका के नीचे लबालब भरा है पानी

 शुक्रवार, 20 अप्रैल, 2012 को 14:42 IST तक के समाचार
पानी की किल्लत

अफ्रीका में पानी की भारी किल्लत पाई जाती है

रेगिस्तान में अक्सर मरीचिका यानी पानी होने का भ्रम पैदा हो जाता है, लेकिन वहां पानी कहीं नजर नहीं आता. मगर अब वैज्ञानिकों का कहना है कि अफ़्रीकी रेगिस्तान पानी से लबालब है. बस वो जमीन के ऊपर नहीं, उसके नीचे है.

सूखे द्वीप के नाम से बदनाम अफ्रीका में भूजल के विशाल भंडार बताए गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि वहां जमीन की सतह पर जितना पानी है, उसका 100 गुना पानी जमीन के नीचे है.

उन्होंने इन छिपे संसाधनों का अब तक का सबसे विस्तृत मानचित्र पेश किया है.

मगर साथ ही 'एनवायर्मेंटल रिसर्च लेटर्स' नाम के जर्नल में प्रकाशित शोधपत्र में कहा गया है कि पानी निकालने के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई जल आपूर्ति बढ़ाने का बढ़िया तरीका नहीं होगा.

बताया जाता है कि अफ्रीका में 30 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है.

पानी रे पानी

आने वाले दशकों में आबादी और उसके चलते फसलों के लिए सिंचाई की मांग बढ़ने के कारण पानी की मांग में जबरदस्त इजाफा होगा.

अफ्रीका में पानी

वैज्ञानिकों ने अफ्रीका में भूजल भंडारों का यह मानचित्र तैयार किया है

ताजे पानी की नदियों और झीलों में मौसम के मुताबिक बाढ़ आने और सूखे के कारण इस पानी तक लोगों और सिंचाई साधनों की पहुंच सीमित ही है.

फिलहाल कृषि योग्य पांच प्रतिशत जमीन पर ही सिंचाई होती है.

अब पहली बार वैज्ञानिकों ने अफ्रीका में जमीन के नीचे चट्टानों में छिपे पानी का विस्तृत विश्लेषण पेश किया है. ब्रितानी भूगर्व सर्वेक्षण (बीजीएस) और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) ने अफ्रीका में भूजल की मात्रा और संभावना के बारे में एक विस्तृत मानचित्र तैयार किया है.

इस शोधपत्र के लेखकों में से एक बीजीएस की हेलेन बोंसर का कहना है कि अब तक भूजल के बारे में किसी को दूर दूर तक ख्याल नहीं था. वो मानती हैं कि नए मानचित्र से लोगों को इन नई संभावना के बारे में पता चलेगा.

भरपूर पानी

वो बताती हैं, “उत्तरी अफ्रीका में लीबिया, अल्जीरिया और चाड में भूजल के सबसे बड़े भंडार हैं. पूरे इलाके में जलभंडार की गहराई 75 मीटर है जो कि बहुत ही बड़ा भंडार है.”

सहारा का इलाका सदियों पहले होने वाले जलवायु परिवर्तनों की वजह से रेगिस्तान में तब्दील हो गया. उसके नीचे मौजूद भंडार 5000 साल पुराने हो सकते हैं.

सहारा रेगिस्तान

इस रेगिस्तान के नीचे वैज्ञानिकों ने पानी के बड़े भंडार बताए है

वैज्ञानिकों के इस शोध का आधार सरकारी भूगर्भीय जल मानचित्र और इस बारे में हुए 283 अध्ययनों से मिली जानकारी है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन देशों में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत बताई जाती है, वहां भारी मात्रा में भूजल के बड़े भंडार हैं.

हालांकि वैज्ञानिक इस बारे में बहुत ही सावधानी बरत रहे हैं कि इन छिपे जल संसाधनों तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है. उनका कहना है कि व्यापक स्तर पर बोरिंग से पानी निकालने से काम नहीं चलेगा.

वैज्ञानिक तो यहां तक कह रहे हैं कि भूजल का यह इतना बड़ा भंडार है कि इसके जरिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले संभावित बदलावों से भी निपटा जा सकता है.

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