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मात्र पांच रूपए में हो सकेगी हीमोग्लोबिन जांच

 रविवार, 8 अप्रैल, 2012 को 10:44 IST तक के समाचार
एनीमिया

भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं एनीमिया का शिकार होती है

भारत के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं लचर अवस्था में है. स्थिती दूर दराज के इलाको में और खराब हो जाती है, जहां हजारों लोगों की बिना चिकित्सा पाए ही मौत हो जाती है.

एनीमिया यानि खून की कमी का ही उदाहरण ले लीजिए, आधे से ज्यादा मामलों में नरीज आयरन की दवाइयों से ही ठीक हो सकते है. लेकिन बिना उपचार के ये बीमारी और विकराल रूप ले लेती है, खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए.

मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक मिशकिन इंग्वले को पहली बार इस समस्या के बारे में अपने दोस्तो से पता चला, जो भारत के ग्रामीण इलाकों में युवा डॉक्टरों के तौर पर काम करते है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, ''गर्भवती महिलाओं की मौत के हर में से एक मामले के पीछे एनीमिया है. मुझे इस समस्या के बारे में नहीं पता था लेकिन मेरे दोस्त मैदान पर इससे जूझ रहें थे.''

यंत्र से मदद

इंग्वले ने एक इस समस्या को सुलझाने के लिए अपने तकनीकी ज्ञान का प्रयोग एक ऐसे उपकरण बनाने पर किया जिसका आसानी से कोई भी प्रयोग कर ले.

टचएचबी

इस यंत्र से बिना सुई लगाए खून की जांच की जा सकेगी

उन्होंने कहा, ''मुझे तकनीक की थोड़ी समझ थी और मुझे डिब्बे में चीजे रखना भी आता था.''

इस काम के लिए उन्होंने हॉलीवुड से प्रेरणा ली थी.

इंग्वले ने बीबीसी को बताया, ''मैने ऐसी मशीन हॉलीवुड में देखी थी, जब कोई अस्पताल के बिस्तर पर लेटा था और लोग उसकी तरफ देख रहे थे.''

इंग्वले जिस यंत्र का जिक्र कर रहें हैं उसका नाम पल्स ऑक्सिमीटर है. इस तकनीक से जरिए मरीज के शरीर में बिना कोई चीरा या सुई लगाकर हीमोग्लोबिन की जांच की जाती है. मरीज के उंगली पर एक क्लिन लगाई जाती है जो मशीन से जुड़ी होती है.

इसी तरह के एक यंत्र की जरूरत भी थी, जिसके मदद से स्वास्थ्यकर्मी बिना सुई लगाए भी आसानी से रक्त परीक्षा कर ले. इसके अलावा जांच के लिए जरूरी अन्य संसाधनो की कमी से भी निबटने के लिए ये यंत्र सफल साबित हो सकता था.

इंग्वले ने कहा, ''मैने देखा कि बाजार में ऐसा कोई यंत्र उपलब्ध नहीं था जो इस तकनीक से खून की जांच कर सके.''

इसी जरूरत को देखते हुए इंग्वले ने खुद ही इस तकनीक पर काम शुरू कर दिया.

पाथ स्वास्थ्य संस्था में अधिकारी नोआह पेरिन ने कहा, ''हमने जब पहली बार इसे देखा तब ये सिर्फ लंच बॉक्स में रखे कुछ तारों जैसा दिखता था.''

पाथ संस्था स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई तकनीक को सम्मिलित करने पर काम करती है और उसे पिछले बीस सालों से ऐसे ही किसी यंत्र की जरूरत थी.

सूई की जरूरत नहीं

इंग्वले

टच एचबी के जनक मिशकि इंग्वले चाहते है कि उनके तकनीकी ज्ञान का प्रयोग सही जगह पर हो.

नया यंत्र दिखने में पहले के मुकाबले बेहतर है जो कि बैटरी से चलता है और बिना सुई लगाए हीमोग्लोबिन की जांच कर सकता है.

यंत्र का नाम टच-एचबी रखा गया है जो मरीज की उंगली के परीक्षण से ही जानकारी जुटा लेता है. ये यंत्र सिर्फ एक मिनट में एनिमिया का पता लगा सकता है और इसका परीक्षण दक्षिण भारत के चिकित्सालयों मे किया जा रहा है.

उम्मीद की जा रही है कि साल के अंत तक ये बाजार में भी उपलब्ध हो जाएगा.

माना जा रहा है कि टच-एचबी की कीमत दो सौ से तीन सौ रूपे के बीच रखी जा सकती है और रक्त जांच के लिए मरीजों से सिर्फ पांच रूपए लिए जाएंगे.

इंग्वले का मानना है कि इस यंत्र के फायदे को देखते हुए इसका दाम बहुत ज्यादा नहीं है.

उन्होंने कहा, ''गर्भवती महिलाओं को हर तीन महीने में हीमोग्लोबिन टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है. ये उन महिलाओं के लिए तकलीफ की बात हो सकती है जिनके घर से स्वास्थ्य केन्द्र दूर है.''

इस यंत्र के इजाद के बाद मरीज के निवास पर ही हीमोग्लोबिन जांच की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, और जरूरत पड़ने पर इलाज भी सही समय पर शुरू हो सकेगा.

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