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गूगल का चमत्कारी चश्मा

 शुक्रवार, 6 अप्रैल, 2012 को 10:41 IST तक के समाचार

चश्मे में लगे स्क्रीन पर तमाम जानकारियां हासिल की जा सकती हैं.

गूगल ने संवर्धित रिएलिटी चश्मों पर किए गए शोध की जानकारी सार्वजनिक कर दी है.

इस परियोजना का नाम है प्रोजेक्ट ग्लास और गूगल ने इससे जुड़ी संक्षिप्त जानकारी, जैसे इसकी तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल नेटवर्किंग साइट गूगल+ पर जारी की हैं.

तस्वीरों में चश्मे पर लगे माइक्रोफोन और आंशिक रूप से पारदर्शी वीडियो स्क्रीन को दर्शाया गया है जो कि इस्तेमाल करनेवाले की दाईं आंख के सामने लगी होगी.

इस उत्पाद को विकसित करनेवाले शोधकर्ताओं का कहना है कि गूगल+ पर जारी कर वो इसके बारे में लोगों की राय जानना चाहते हैं.

हालांकि उन्होंने ये संकेत नहीं दिया कि ये उत्पाद बिक्री के लिए बाजार में कब उतारा जाएगा और इसकी कीमत क्या होगी.

"हममें से कुछ लोगों ने प्रोजेक्ट ग्लास की शुरुआत की ताकि ऐसी तकनीक विकसित की जा सके जिससे आपको अपनी दुनिया से जुड़ी बातें पता चल सकें और उसे आपस में बांटा भी जा सके."

गूगल एक्स

गूगल की प्रयोगशाला गूगल एक्स ने अपने बयान में कहा, ''हममें से कुछ लोगों ने प्रोजेक्ट ग्लास की शुरुआत की ताकि ऐसी तकनीक विकसित की जा सके जिससे आपको अपनी दुनिया से जुड़ी बातें पता चल सकें और उसे आपस में बांटा भी जा सके. हम ये जानकारी इसलिए साझा कर रहे हैं ताकि इस पर बातचीत की जा सके और आपके सुझावों से सीखा जा सके.''

सुविधाएं

रिएलिटी चश्मों पर जारी किए गए वीडियो से पता चलता है कि उपभोक्ताओं को इससे 14 अलग-अलग तरह की सेवाएं मिल सकेंगी, जिनमें मौसम संबंधी जानकारी, उनकी भौगोलिक स्थिति और डायरी में दर्ज व्यस्तताओं की सूचना शामिल है.

फिल्म में दिखाया गया है कि चश्मा प्रयोगकर्ता को शाम की एक मुलाकात की सूचना देता है और ये भी बताता है कि शाम को बारिश होने की दस फीसदी संभावना है.

गूगल का चश्मा जीपीएस चिप के जरिए ये भी चेतावनी देता है कि सब-वे सेवा निलंबित है.

उपभोक्ता का कोई दोस्त यदि उसे संदेश भेजता है कि वो उससे दिन में किसी वक्त मिलना चाहता है तो उसे भी बोलकर जवाब दिया जा सकता है.

वीडियो डिस्प्ले वाला चश्मा ये भी बताएगा कि सब-वे सेवा निलंबित है.

चश्मे में गूगल मैप की सुविधा भी उपलब्ध है जिसकी मदद से उपभोक्ता अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकता है.

इसके साथ ही यूजर अगर किसी दृश्य को देख रहा है और उसकी तस्वीर लेना चाहता है तो वो भी इस चश्मे से संभव है, साथ ही तस्वीर को मित्रों के साथ शेयर करने का विकल्प भी मौजूद है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी.

वीडियो में ये भी दिखाया गया है कि गूगल के चश्मे से संगीत भी सुना जा सकता है.

कीमत

गूगल के इस प्रोजेक्ट को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे और कुछ खबरों में इसे बेहद गोपनीय बताया जा रहा था, लेकिन ये पहली बार है कि गूगल ने सार्वजनिक कर दिया है कि वो किस परियोजना पर काम कर रहा है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहले खबर दी थी कि गूगल के चश्मे का पहला संस्करण इस साल के आखिर में बिक्री के लिए बाजार में आएगा और इसकी कीमत होगी 250 से 600 डॉलर के बीच.

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वीडियो में जो तकनीक दिखाई गई है उसे बाजार में आने में थोड़ा और वक्त लग सकता है.

इससे पहले 'ब्रदर' जैसी कंपनी ने इस तकनीक को विकसित करने का प्रयास किया था लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल सकी.

प्रतियोगिता

गूगल के चश्मे से दुकान में रखी चीजों की भी जानकारी मिल सकेगी.

गूगल अगर चश्मे को कामयाबी से बाजार में उतार पाता है तो उसे कुछ अन्य कंपनियों से प्रतियोगिता का सामना भी करना पड़ सकता है.

2008 में एप्पल ने लेसर तकनीक पर आधारित सिर पर लगने वाले एक डिस्प्ले सिस्टम का पेटेंट करवाया था जिसमें आईपॉड से वीडियो देखने की सुविधा थी.

हाल ही में सोनी और माइक्रोसॉफ्ट ने भी उपभोक्ता की आंखों के ठीक सामने लगने वाले छोटे डिस्प्ले को विकसित करने के विचार को पेटेंट करवाया है.

गूगल इससे पहले भविष्य की अपनी योजनाओं के बाजार में उतारे जाने से कई साल पहले ही उसकी घोषणा कर देता था.

जैसेकि 2010 में कंपनी ने घोषणा की थी कि उसने कैलिफोर्निया की सड़कों पर एक स्वचालित कार का परीक्षण किया है, लेकिन ये नहीं बताया था कि ऐसी कार बिक्री के लिए कब उपलब्ध हो सकेगी.

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