नौ देशों में विलुप्त हो सकता है धर्म

जनगणना

नौ देशों के लगभग एक सदी के जनगणना आंकड़ो के अध्ययन के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं.

शोधकर्त्ताओं के अनुसार नौ देशों की जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि वहां धर्म विलुप्त होने की कगार पर है. आंकड़े ऐसे लोगों की संख्या में बढ़ोतरी के संकेत देते हैं जो किसी प्रकार की धार्मिक प्रतिबद्धता से इंकार करने का दावा करते हैं.

'अमेरिकन फ़िज़िकल सोसाइटी' में छपे शोध के नतीजे इशारा करते हैं कि इन देशों में धर्म का लगभग अंत हो जाएगा.

शोधकर्त्ताओं की टीम के एक सदस्य नॉर्थवेस्ट विश्वविद्यालय के डेनियल एब्राम्स ने वर्ष 2003 में ऐसा ही एक शोध दुनिया की कम बोले जाने वाली भाषाओं पर किया था.

'रिसर्च कॉरपोरेशन फ़ॉर साइंस एडवांसमेंट' के डॉक्टर रिचर्ड वीनर बीबीसी को बताया, "ये एक सीधा-सा विचार है. जिस सामाजिक समूह में अधिक लोग होंगे, उसकी ओर और अधिक लोग आकर्षित होंगे."

धर्म को ख़तरा

ये एक सीधा-सा विचार है. जिस सामाजिक समूह में अधिक लोग होंगे, उसकी ओर और अधिक लोग आकर्षित होंगे.

डॉक्टर रिचर्ड वीनर

उदाहरण के तौर पर डॉक्टर रिचर्ड वीनर कहते हैं कि पेरु में लोग विलुप्त होती जा रही स्थानीय भाषा 'क्यूचुआन' के बजाय स्पेनी भाषा बोलने को कारगर समझ सकते हैं, और यही धर्म के साथ भी हो सकता है.

शोधकर्त्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चेक गणराज्य, फ़िनलैंड, आयरलैंड, नीदरलैंड्स, न्यूज़ीलैंड और स्विटज़रलैंड के एक सदी के जनगणना आंकड़ों का अध्ययन किया.

डॉक्टर रिचर्ड वीनर ने कहा, "बहुत से आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रों में लोग ख़ुद को धर्म से अलग करते जा रहे हैं. नीदरलैंड्स में ये आंकड़ा 40 फ़ीसदी है लेकिन चेक गणराज्य में 60 फ़ीसदी लोग किसी भी धर्म से प्रतिबद्धता नहीं दिखाते."

और इन सभी देशों में धर्म विलुप्त होने की कगार पर है. डॉक्टर वीनर इसे 'एक संकेतात्मक नतीजा' मानते हैं.

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