'हेरोइन से ज़्यादा ख़तरनाक है शराब'

शराब का सेवन ज़्यादा लोग करते हैं इसलिए नुक़सान ज़्यादा होता है

मेडिकल पत्रिका लैंसेट में छपे एक ताज़ा शोध के मुताबिक़ शराब स्वास्थ्य के लिए हेरोइन से भी ज़्यादा नुक़सानदेह है.

इस शोध में ये भी कहा गया है कि तंबाकू और कोकीन भी शराब जितने ही हानिकारक हैं, जबकि 'एक्सटेसी' और 'एलएसडी' जैसी नशे की दवाओं को सबसे कम नुक़सानदेह ड्रग बताया गया है.

इस रिपोर्ट के सह लेखक ब्रिटेन के पूर्व मुख्य औषधि सलाहकार डेविड नट है, जिन्हें सरकार ने अक्टूबर 2009 में नौकरी से निकाल दिया था.

पद से हटाए जाने के बाद नशीली दवाओं के असर पर प्रोफेसर डेविड नट ने एक स्वतंत्र वैज्ञानिक कमेटी के साथ शोध किया.

इस शोध मे उनका साथ डॉ. लेस किंग ने दिया जो कि पूर्व सरकारी सलाहकार हैं.उन्होंने प्रोफेसर डेविड नट के साथ हुए व्यवहार के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया था.

नशीली दवा

कुल मिलाकर शराब सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह नशा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल समाज में व्यापक स्तर पर होता है

प्रोफ़ेसर डेविड नट

नशीली दवाओं या पदार्थों से होने वाले दिमाग़ी नुक़सान, शारीरिक नु्कसान, लत, अपराध, अर्थव्यवस्था और समाज पर पड़ने वाले असर के आधार पर हर नशीली दवा को अंक देकर सूचीबद्ध किया गया.

इस शोध का निष्कर्ष ये निकला कि हेरोइन, क्रैक और मिथाईलएम्फ़ैटैमिन (जिसे क्रिस्टल मेथ भी कहा जाता है) किसी भी इंसान के लिए सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह हैं.

शोध के अनुसार शराब, हेरोइन और क्रैक समाज के लिए सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह है.

प्रोफेसर डेविड नट ने बीबीसी को बताया, "कुल मिलाकर शराब सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह नशा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल समाज में व्यापक स्तर पर होता है."

प्रोफेसर डेविड नट इस शोध को समझाते हुए कहते हैं, "क्रैक कोकीन की लत शराब से ज़्यादा बुरी है, लेकिन लाखों लोग हैं जो शराब की लत के शिकार हैं और उसे हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं."

प्रोफेसर डेविड नट ने कहा कि ये ज़रुरी है कि ड्रग्स का एक इंसान पर पड़ने वाले असर और समाज पर पड़ने वाले असर को अलग- अलग देखना चाहिए.

हालांकि लैंसेट में छपे अध्ययन में फ़िलहाल एक से ज़्यादा ड्रग लेने वालों को होने वाले नुक़सान पर कुछ नहीं कहा गया है.

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