नाक से परेशान बंदर

छींकते छींकते परेशान हो जाते हैं ये बंदर.

बर्मा में बंदरों की एक नई प्रजाति मिली है जिनकी नाक ने उनकी नाक में दम कर रखा है.

वैज्ञानिकों को इन बंदरों के बारे में स्थानीय शिकारियों से जानकारी मिली है.

लंबी पूंछ और सफ़ेद कान वाले इन बंदरों की ख़ासियत है इनका चेहरा.

इनकी नाक की बनावट ऐसी है कि नाकों का छिद्र आसमान की ओर उठा हुआ है.

छिपना मुश्किल

ऐसी स्थिति में जब भी बारिश होती है तो पानी सीधा इनकी नाक के अंदर गिरता है और बेचारे बंदर लगातार छींकते रहते हैं.

उत्तरी बर्मा के कचिन इलाके के जंगलों में पाए जानेवाले इन बंदरों के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी बारिश होती है इन बंदरों को ढूंढना बेहद आसान हो जाता है.

वो कहते हैं कि ये बंदर जब छींकते छींकते परेशान हो जाते हैं तो कई दिनों चेहरे को अपने घुटनों में छिपाए रखते हैं जिससे बारिश की बूंदें नाकों में न जाएं.

इन बंदरों की प्रजाति राइनोपिथेकस स्ट्राइकेरी कहलाती है लेकिन स्थानीय लोग इन्हें उल्टे हुए चेहरे वाले बंदर के नाम से जानते हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रजाति के मुश्किल से 330 बंदर रह गए हैं जो मओ नदी के आसपास के छोटे से क्षेत्र में सिमटे हुए हैं.

जिन जंगलों में ये बंदर रहते हैं वहां बहुत सारे पेड़ों को काटा जा रहा है और वहां नई नई सड़कें और बांध बना रही चीनी कंपनियों से भी उन्हें ख़तरा है.

कई अन्य वन्य प्रजातियों की तरह ही इन बंदरों की भविष्य भी अंधकारमय नज़र आ रहा है.

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