मंगल ग्रह पर विशाल समुद्रों के प्रमाण

मंगल ग्रह पर हेलास गह्वर में कभी विशाल समुद्र हुआ करता था

अमरीकी वैज्ञानिकों को इस बात के और सबूत मिले हैं कि मंगल ग्रह पर करोड़ों साल पहले विशाल समुद्र हुआ करते थे.

एक भूविज्ञानी मानचित्र परियोजना को मंगल ग्रह के हेलास प्लांटिया नामक क्षेत्र में तलछट मिली है जो इस बात का संकेत है कि यहां कभी समुद्र था.

हेलास 2,000 किलोमीटर चौड़ा और आठ किलोमीटर गहरा विशाल गड्ढा है.

अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि उन्हें प्राप्त आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि साढ़े तीन से लेकर साढ़े चार अरब साल पहले यहां एक समुद्र रहा होगा.

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल पर जीवन के विकास के लिए पृथ्वी से अधिक अनुकूल परिस्थितियां थीं.

टस्कन के प्लैनिटरी साइंस इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ लैस्ली ब्लीमास्टर कहती हैं, "अब जो नक्शा बना है वो पिछले अध्ययनों की भूविज्ञानी व्याख्या की पुष्टि करता है और बताता है कि ये विशाल सागर मंगल ग्रह के नोचियन काल में हुआ करते थे".

शोधकर्ताओं का कहना है कि हेलास के पूर्वी किनारे पर तलछट की बारीक परतें मिली हैं.

ये मंगल ग्रह की पर्वतीय चट्टानों और मिट्टी के इस पानी में आने और क्षरण से पैदा हुई.

मंगल के इस क्षेत्र के और अध्ययन से यह सुराग मिल सकेगा कि ये पानी कहां गया और मंगल ग्रह की जलवायु कैसे बदली.

नासा के मार्सपाथ फ़ाइंडर मिशन में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ अमिताभ घोष कहते हैं, "ऐसा कभी पृथ्वी पर भी हो सकता है. हम पृथ्वी पर ग्रीनहाउस गैसों का असर देख रहे हैं".

"शुक्र ग्रह पर ग्रीनहाउस प्रभाव है. यह माना जाता है कि कभी वहां पृथ्वी जैसे समुद्र थे लेकिन तापमान बढ़ने से ये भाप बनकर उड़ गए. और क्योंकि शुक्र में चुम्बकीय क्षेत्र का अभाव था इसलिए हाइड्रोजन गैस सौर हवा के साथ अंतरिक्ष में चली गई. ऐसा क्यों हुआ यह जानने के लिए मंगल और शुक्र जैसे ग्रहों का अध्ययन करना बहुत ज़रूरी है".

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के यानों वाइकिंग ऑरबिटर, मार्स ग्लोबल सर्वेयर और मार्स ओडिसी पर लगे अनेक उपकरणों से मिली जानकारी के आधार पर यह मानचित्र बनाना संभव हुआ.

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