हाथ के जीवाणुओं से होगी पहचान

जीवाणु

हथेलियों पर ऐसे जीवाणु होते हैं, जो आसानी से नहीं ख़त्म होते

वैज्ञानिकों का दावा है कि हर व्यक्ति के हाथों पर मिलने वाले जीवाणु फिंगर प्रिंट या डीएनए की तरह उनकी पहचान के लिए उपयोगी साधन हो सकते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि उंगलियों और हाथों पर मिलने वाले कुछ जीवाणु ही सभी लोगों में पाए जाते हैं.

और तो और एक समान डीएनए वाले जुड़वा लोगों के हाथों पर भी अलग-अलग जीवाणु पाए जाते हैं.

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता मैट मैकग्रा के मुताबिक़ वैज्ञानिकों का दावा है कि नियमित जीवन में हर व्यक्ति ऐसे जीवाणुओं को छोड़ जाता है, जो फिंगर प्रिंट या डीएनए की तरह उनकी पहचान में इस्तेमाल हो सकते हैं.

हम भले ही ये सोच लें कि हमने अपने हाथ बहुत अच्छी तरह से धो लिए हैं, इसके बावजूद हमारी हथेलियों पर 150 अलग-अलग प्रजाति के जीवाणु मौजूद रहते हैं.

प्रयोग

नियमित रूप से हाथ धोने के बाद भी इनकी उपस्थिति में कोई फ़र्क नहीं आता.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोरैडो के शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर के की-बोर्ड को झाड़ा-पोंछा और कंप्यूटर मालिकों के जीवाणुओं से उन्हें मिलाया.

शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मालिकों के सैंपल और आकस्मिक रूप से लिए अन्य लोगों के सैंपल में अंतर पाया.

वैज्ञानिकों का दावा है कि ये तकनीक 70 से 90 फ़ीसदी सही है और समय के साथ ये और भी सही और सटीक होगी.

उनका कहना है कि ये तकनीक एक अतिरिक्त फ़ॉरेंसिक साधन की तरह इस्तेमाल हो सकती है. ये सबूतों की और पुष्टि कर सकती है.

शोधकर्ताओं को ये भी पता चला है कि ये जीवाणु सामान्य तापमान पर दो सप्ताह तक जीवित रह सकते हैं.

इस तरह पहचान के लिए इन जीवाणुओं का इस्तेमाल उस परिस्थिति में भी हो सकता है जब फिंगर प्रिंट नहीं हों या पर्याप्त डीएनए न मिलें.

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