चांद पर मिला ढेर सारा पानी

रॉकेट टकराने के बाद लिया गया चित्र

वैज्ञानिकों को पानी मिलने के संकेत तो पहले ही मिल गए थे लेकिन ढेर सारा पानी होने की पुष्टि अब हुई है

अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा के वैज्ञानिकों ने बताया है कि पिछले महीने के उनके एक प्रयोग से पता चला है कि चांद पर भारी मात्रा में पानी मौजूद है.

नासा ने पिछले महीने चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर अपना एक रॉकेट जान-बूझकर टकरा दिया था ताकि वहाँ पानी की मौजूदगी के बारे में पता लगाया जा सके.

वैज्ञानिकों ने रॉकेट से मिले आंकड़ों का गहन अध्ययन करने के बाद बताया है कि रॉकेट पर लगे यंत्र को भारी मात्रा में पानी के संकेत मिले हैं.

जब वैज्ञानिकों से पूछा गया कि कितना पानी होगा तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जहाँ रॉकेट टकराया था वहाँ लगभग 100 लीटर पानी होगा.

इतना पानी रॉकेट के टकराने से बने 20 से 30 मीटर चौड़े गड्ढे में मिला है.

वैज्ञानिक उत्साहित

इस अभियान का नाम न्यूनर क्रेटर ऑब्ज़र्वेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट (एलसीआरओएसएस) रखा गया था.

हम अपने निकटतम पड़ोसी के बारे में कई नई जानकारियाँ हासिल कर रहे हैं, चांद का रहस्य धीरे धीरे सामने आ रहा है. चांद के बारे में समझने पर पूरे सौरमंडल के बारे में समझने में मदद मिलेगी

माइकल वार्गो, नासा के वैज्ञानिक

इस अभियान के मुख्य वैज्ञानिक एंथोनी कोलाप्रेट ने कहा, "अपने पिछले महीने के प्रयोग के बारे में अब हम बता सकते हैं कि हमें चंद्रमा पर पानी मिल गया है. यह पानी थोड़ा बहुत नहीं है यह ढेर सारा पानी है. दो गैलन की एक दर्जन बालटियों जितना."

नासा में चंद्रमा के अध्ययन से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक माइकल वार्गो ने कहा, "हम अपने निकटतम पड़ोसी के बारे में कई नई जानकारियाँ हासिल कर रहे हैं, चांद का रहस्य धीरे धीरे सामने आ रहा है. चांद के बारे में समझने पर पूरे सौरमंडल के बारे में समझने में मदद मिलेगी."

वार्गो का कहना है, "चांद पर ढेर सारे रहस्य छिपे हैं और हमारा रॉकेट उन्हें खोजने में काफ़ी मददगार साबित हो रहा है."

चांद पर बर्फ़ की शक्ल में जमा हुआ पानी मिलना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक बहुत ही अहम उपलब्धि है और वैज्ञानिक पता लगाएँगे क्या इस पानी का भविष्य में कोई उपयोग हो सकता है.

वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर रॉकेट के टकराने के बाद उछले पत्थर के टुकड़ों, बर्फ़ के टुकड़ों और अन्य कणों का बारीक़ विश्लेषण करने के बाद पाया कि बर्फ़ की मात्रा काफ़ी अधिक थी.

पानी मिलने की इस घटना से उत्साहित होने का कारण बताते हुए ब्राउन यूनिवर्सिटी के पीटर शुल्ज़ ने कहा है, "जो बात हमें उत्साहित कर रही है वो यह है कि हमने सिर्फ़ एक ही जगह इसकी तलाश की है. यह ठीक उसी तरह से है जैसे कि आप तेल की तलाश में ड्रिलिंग कर रहे हों और जब एक जगह आपको तेल मिल जाए तो इसकी बड़ी संभावना होती है कि आसपास और भंडार भी हों."

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शुरूआत भर है, आगे के अध्ययन से और भी नई जानकारियाँ सामने आने की उम्मीद है.

अगर भविष्य में पता चलता है कि वहाँ पानी की मात्रा पर्याप्त है तो यह उन अंतरिक्षयात्रियों के लिए एक उपयोगी चीज़ साबित हो सकती है, जो भविष्य में चंद्रमा के ध्रुवों पर जाकर रुकेंगे.

नासा के वैज्ञानिक माइक वार्गो कहते हैं, "इसका उपयोग पीने के पानी के रुप में हो सकता है."

नासा का यह अभियान 18 जून को शुरु किया गया था.

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