
मादा मक्खी को जीतने के लिए लड़ मरने वाली डॉसन मक्खी
कहते हैं कि 'इश्क़ और जंग में सब कुछ जायज़ है'. ये कहावत डॉसन मक्खियों पर लागू होती है क्योंकि वो मादा मक्खियों का दिल जीतने के लिए एक दूसरे की जान ले लेती हैं.
अपनी ही जाति के जीवों को इस तरह मारना पशु जगत में बहुत कम देखने में आता है. लेकिन ये मक्खियां एक दूसरे से भिड़ जाती हैं और जब तक लड़ाई ख़त्म होती है सब की सब धराशायी हो चुकी होती हैं.
डॉसन मक्खियां ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती हैं और मिट्टी में बिल बनाकर रहती हैं.
हर साल नर मक्खियां मादा मक्खियों से पहले अपने बिल से निकलती हैं.
इनमें से छोटी मक्खियां अपना साथी ढूंढने के लिए फूलों के आस पास मंडराती हैं लेकिन बड़ी मक्खियां मादा मक्खियों के बिलों के बाहर ही चक्कर लगाती रहती हैं जिससे जैसे ही वो निकलें उन्हे जीत लिया जाए.
मादा मक्खियों को जीतने के लिए लड़ाई
लेकिन साथी ढूंढने का काम उतना आसान नहीं होता. मादा मक्खियों की गंध बड़ी नर मक्खियों को उकसा देती है. और जैसे ही मादा मक्खियां बाहर निकलती हैं नर मक्खियां एक दूसरे पर झपट पड़ती हैं.
नर मक्खियों के झुंड बन जाते हैं एक दूसरे को डंक मार कर मौत के घाट उतार देते हैं. नतीजा होता है सामूहिक हत्या. नर मक्खियों की पूरी की पूरी पीढ़ी का ही सफ़ाया हो जाता है.
इनमें से कोई एक नर मक्खी बच जाती है जो मादा मक्खी के साथ हो लेती है. यही नहीं कई बार नर मक्खियां इतनी आक्रामक हो जाती हैं कि लड़ाई में मादा मक्खियां भी मारी जाती हैं.
रोचक बात ये है कि डॉसन मक्खियों का ये रूप साल में एक बार ही देखने को मिलता है. बाक़ी समय वो बड़ी समरसता में जीती हैं.
इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि अधिकतर नर मक्खियां मारी जा चुकी होती हैं. और मादा मक्खियां ही अगली पीढ़ी को पैदा करती है और उसकी परवरिश करती है.












