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दिल का हाल हुआ है बेहतर

फ़ाइल फ़ोटो

ये धुंआं है ख़तरनाक

शोधकर्ताओं का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने पर लगी पाबंदी से दिल का दौरा पड़ने के मामलों में काफ़ी कमी आई है.

यूरोप और उत्तरी अमरीका में पाबंदी लगने के बाद से दिल के दौरों में एक तिहाई की कमी दर्ज की गई है.

ये संख्या पहले लगाए गए अनुमान से कहीं ज़्यादा है.

इसके पहले इंग्लैंड के स्वास्थ्य विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया था जिसमें कहा गया था कि 2007 में लगी इस पाबंदी के बाद से दिल के दौरों में 10 प्रतिशत की कमी आई है.

इससे हार्ट अटैक के मामले बिल्कुल ही ख़त्म हो जाएंगे ऐसा तो नहीं है लेकिन ये इस बात का सबूत है कि इस तरह की पाबंदी कई दिल के दौरों को रोक सकती है

डॉ जेम्स लाईटवूड

लेकिन ये नया शोध, जो लाखों लोगों पर किए गए सर्वेक्षणों पर आधारित है, कहता है कि सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट पर लगी पाबंदी से हार्ट अटैक के मामलों में 26 प्रतिशत की कमी आई है.

माना जाता है कि सेकंड हैंड स्मोकिंग या दूसरे के मुंह से निकले धुँएं से हार्ट अटैक के मामले बढ़ते हैं क्योंकि वो शरीर के अच्छे कोलेस्टरॉल की मात्रा कम करता है, ख़ून में थक्के बनाने के ख़तरे को बढ़ाता है और हृदय गति को ख़तरनाक उतार चढ़ाव की ओर ले जाता है.

इस शोध का नेतृत्व करनेवाले डॉ जेम्स लाईटवूड का कहना है कि जब से ये पाबंदी लगी है तभी से इस तरह के मामलों में कमी हर साल दर्ज की जा रही है और ये जारी है.

उनका कहना है, ``इससे हार्ट अटैक के मामले बिल्कुल ही ख़त्म हो जाएंगे ऐसा तो नहीं है लेकिन ये इस बात का सबूत है कि इस तरह की पाबंदी कई दिल के दौरों को रोक सकती है.’’

भारत के बारे में फ़िलहाल इस तरह के आंकड़े नहीं हैं लेकिन कुछ समय पहले हुए एक शोध के अनुसार 2010 तक यहां हर साल सिगरेट पीकर मरनेवालों की संख्या दस लाख तक पहुंच जाएगी.

भारत में भी सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने पर पाबंदी है लेकिन इसका उस तरह से पालन नहीं हो पाया है जैसे पश्चिमी देशों में.

बीबीसी को जानिए

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