सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चार जून 2011 की रात को दिल्ली के रामलीला मैदान पर योग गुरु रामदेव के समर्थकों और पुलिस के बीच हुई झड़प के लिए दोनों पक्ष जिम्मेदार हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि इस घटना को टाला जा सकता था.
कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव ने लापरवाही बरती लेकिन अदालत ने पुलिस की ज्यादा ग़लती मानी है.
सुप्रीम कोर्ट ने गृहमंत्री को पूरे मामले में क्लीन चिट दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस पर ज़्यादती करने और ताकत दिखाने का भी आरोप लगाया है, जिससे आम लोगों के मूल अधिकारों का हनन हुआ था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना में घायल रामदेव समर्थक राजबाला और अन्य पीडि़तों को मुआवज़ा देने के लिए कहा है. साथ ही दिल्ली पुलिस को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है.
कोर्ट ने हादसे की रात हिंसक व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों और रामदेव के समर्थकों के खिलाफ़ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है.