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सरबजीत की अपील ख़ारिज
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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की उस अपील को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने उन्हें दी गई फाँसी
की सज़ा को चुनौती दी थी.
सरबजीत सिंह को वर्ष 1990 में पाकिस्तान में हुए चार बम धमाकों के मामलों में दोषी पाया गया था और उन्हें वर्ष 1991 में फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी. ग़ौरतलब है कि उनका मुकदम लड़ रहे वकील राणा अब्दुल हमीद को पिछले साल पाकिस्तान में पंजाब प्रांत का एडिशनल एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया था. इसके बाद वे इस मामले में पिछली कई सुनवाइयों के दौरान अदालत में हाज़िर नहीं हो पाए हैं. सरबजीत को पिछले साल अप्रैल में फाँसी दी जानी थी लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के इस मामले में हस्तक्षेप के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था. परिवार का दबाव वर्ष 2003 में सरबजीत की अपील पर लाहौर हाई कोर्ट ने उन्हें दी गई फाँसी की सज़ा को सही ठहराया था. इसके बाद पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भी वर्ष 2005 में इस फ़ैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी. फिर पिछले साल तब पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी उनकी राहत दी जाने की अर्ज़ी को ठुकरा दिया था. भारतीय पंजाब में रहने वाले सरबजीत के परिवार के सदस्यों और कुछ ग़ैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद भारत सरकार पर इस मामले में हस्तक्षेप करने का दबाव बढ़ा था. इसके बाद भारतीय सरकार ने पाकिस्तान की सरकार के साथ सरबजीत का मामला उठाया था और सज़ा में रियायत की बात कही थी. पिछले साल सरबजीत को फाँसी दिए जाने के मामले को पहले एक महीने के लिए और फिर अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था. |
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