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'प्राथमिक ज़िम्मेदारी प्रदेश पुलिस की'
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भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर के दौर पर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि राज्य में क़ानून व्यवस्था की
प्राथमिक ज़िम्मेदारी राज्य पुलिस की ही है.
उन्होंने कहा कि इस दिशा में कुछ अहम सुधारों की भी ज़रूरत है और इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति भी जताई जा रही है. लेकिन चिदंबरम ने कहा कि नई व्यवस्था कबतक प्रभावी हो जाएगी और उसका स्वरूप क्या होगा, इसबारे में कुछ कहना जल्दबाज़ी है. राज्य के पत्रकारों को शुक्रवार की सुबह संबोधित कहते हुए गृहमंत्री ने कहा, "सेना का मुख्य दायित्व सीमाओं की रक्षा और घुसपैठ को रोकना है. इनकी भूमिका राज्य के भीतर चरमपंथ से लड़ने की भी हो सकती है. पर राज्य में क़ानून व्यवस्था की प्राथमिक ज़िम्मेदारी राज्य पुलिस की ही है." उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में अगर राज्य पुलिस अपना काम कर पाने में अर्धसैनिक बलों की या सेना की मदद चाहती है तो उनकी ओर से सहयोग दिया जाएगा. पी चिदंबरम ने कहा, "हमारी प्राथमिकता है कि राज्य सरकार के साथ मिलकर राज्य में सुरक्षा व्यवस्था का एक स्वस्थ माहौल तैयार किया जाए. केंद्र इस दिशा में राज्य की हरसंभव मदद के लिए तैयार है. यह एक विशेष स्थिति वाला राज्य है और इसके लिए विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है."
साथ ही उन्होंने कहा, "राज्य में पिछले कुछ महीनों के दौरान चरमपंथ की घटनाओं में कमी दर्ज हुई है. यह एक सकारात्मक संकेत है पर इससे उलट राज्य में अशांति बढ़ी है. हिंसक प्रदर्शनों और विरोध के मामले बढ़े हैं. ऐसा करने वाले ये ध्यान रखें कि इन प्रदर्शनों से आम जनजीवन प्रभावित न हो क्योंकि आम लोग एक सामान्य स्थिति चाहते हैं. स्कूल, चिकित्सा जैसी कई ज़रूरी चीज़ों को प्रभावित न किया जाए." नए गृहमंत्री की पहली यात्रा मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र में जो नई सरकार बनी है, पी चिदंबरम को उसमें गृहमंत्री का दायित्व सौंपा गया है. नई सरकार के गठन के बाद से गृहमंत्री की किसी राज्य के लिए यह पहली यात्रा है. पी चिदंबरम दो दिनों के कश्मीर दौरे पर गुरुवार को श्रीनगर पहुँचे. उन्होंने सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस की एक उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की. बैठक में राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह भी मौजूद थे. पी चिदंबरम ने कहा कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कर्तव्य अलग-अलग परिभाषित हैं. उन्होंने कहा कि सेना और अर्धसैनिक बल के जवान सुरक्षा से संबंधित काम करते हैं जबकि पुलिस क़ानून-व्यवस्था से जुड़े काम.
लेकिन गृह मंत्री की पेशकश भारत समर्थक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की उस मांग से काफ़ी कम है, जिसमें पीडीपी ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई से सेना और अर्धसैनिक बलों को हटाने की मांग की थी और कहा था कि ये कार्रवाई पुलिस को सौंप देनी चाहिए. पीडीपी सेना को वापस भेजने की भी मांग करती रही है. दूसरी ओर राज्य के अलगाववादी गुट भी कश्मीर मसले के राजनीतिक समाधान के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों को धीरे-धीरे हटाने की मांग करते रहे हैं. पी चिदंबरम का कश्मीर दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब शोपियां शहर में दो महिलाओं के साथ बलात्कार और उनकी हत्या के विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं. बलात्कार के आरोप भारतीय सुरक्षाकर्मियों पर लग रहे हैं. हालाँकि माना जा रहा है कि सुरक्षाकर्मियों के साथ गृह मंत्री की बैठक में यह मामला नहीं उठा. गृह मंत्री ने भारत समर्थक राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग से बैठक की. |
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