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वरुण पर रासुका ख़त्म करने का आदेश
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि पीलीभीत से भाजपा उम्मीदवार वरुण गांधी के खिलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा
क़ानून के तहत दर्ज मामला ख़त्म किया जाए.
इस तरह से इस मामले में वे अब आज़ाद हैं और उनकी हिरासत की अवधि को समाप्त करने का आदेश दिया गया है. वरुण गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दायर कर ये माँग की थी कि उनके ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) हटाया जाए. पीलीभीत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उत्तर प्रदेश सरकार ने रासुका लगाया था. रासुका लगाना अवैध उत्तर प्रदेश के सलाहकार बोर्ड ने कुछ दिन पहले उनके ख़िलाफ़ रासुका लगाए जाने को अवैध ठहराया था. उच्च न्यायालय के एक जज और दो सेवानिवृत्त जज इस बोर्ड के सदस्य होते हैं. जब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय किया तो वरुण गांधी ने उत्तर प्रदेश सलाहकार बोर्ड के फ़ैसले को आधार बनाते हुए अर्ज़ी दायर की थी. उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने प्राथमिकता के आधार पर इस मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया था. पेरोल पर रिहा हुए थे जब इससे पहले वरुण गांधी ने रासुका लगाने के उत्तर प्रदेश सरकार के फ़ैसले की वैधता को चुनौती दी थी तब सुप्रीम कोर्ट ने वरुण गांधी को सशर्त पेरोल पर रिहा किया था. वरुण गाँधी के पेरोल की अवधि गुरुवार को समाप्त हो रही थी. उधर मायावती सरकार ने वरुण गांधी पर रासुका समाप्त करने के सलाहकार बोर्ड के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अर्ज़ी दायर की थी. सलाहकार बोर्ड ने इस मामले में कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून बहुत कठोर क़ानून है और वरुण के मामले में इसे लागू करने का पर्याप्त आधार नहीं है. पीलीभीत से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी वरुण गाँधी तीन हफ़्ते एटा जेल में रहे थे जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 16 अप्रैल को पेरोल पर रिहा किए गए. |
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