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रविवार, 08 मार्च, 2009 को 03:52 GMT तक के समाचार
 
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सरकार बचाने की कोशिश में बीजेडी
 
नवीन पटनायक
ग्यारह साल पुराने गठबंधन के टूटने से बीजेपी को नुकसान हो सकता है
उड़ीसा में सीटों के बँटवारे पर गठबंधन टूटने और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्य सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सत्ता बचाने की कोशिशों में जुट गए हैं.

हालाँकि लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन बीजेडी चाहती है कि चुनाव उसके शासन में हो जबकि बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है.

बीजेपी और बीजू जनता दल (बीजेडी) के बीच 11 साल पुराना गठबंधन लोकसभा सीटों के बँटवारे पर असहमति के कारण टूटा है.

शनिवार रात बीजेपी के विधायकों ने राज्यपाल एमसी भंडारे से मुलाक़ात कर उन्हें सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र सौंप दिया.

इसके बाद बीजेडी सरकार अल्पमत में आ गई क्योंकि 147 सदस्यीय विधानसभा में उसके पास 61 सीटें हैं. पहले उसे 32 बीजेपी विधायकों का समर्थन मिल रहा था.

हालाँकि बीजेडी नेता और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने समर्थन होने का दावा किया है.

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के चार विधायकों ने पटनायक सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है. इसके अलावा सात निर्दलियों का समर्थन सरकार को पहले से मिल रहा है.

वाम दलों के तीन विधायकों के भी सरकार का समर्थन करने की संभावना है.

ऐसे में मुख्यमंत्री को 75 विधायकों का समर्थन मिल जाएगा जो 74 के ज़रुरी आँकड़े से एक ज़्यादा है.

नवीन पटनायक रविवार को किसी समय राज्यपाल से मिल कर समर्थन होने का दावा कर सकते हैं. संभावना है कि वो सरकार समर्थक विधायकों को राज्यपाल के समक्ष पेश कर सकते हैं.

सीटों पर असहमति

गठबंधन टूटने की घोषणा ख़ुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने की. उन्होंने कहा कि बीजेडी चाहती थी कि चुनाव जीतने की संभावना के आधार पर सीटों का फ़ैसला हो लेकिन बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं थी.

इसके बाद बीजेपी ने नवीन पटनायक सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है.

 पिछले कुछ समय में बीजेडी का जनाधार बढ़ा है और बीजेपी का जनाधार कम हुआ है, ऐसे में पुराने फ़ार्मूले के आधार पर सीटों का बँटवारा संभव नहीं है
 
नवीन पटनायक

राज्य में लोकसभा की 21 सीटें हैं. पिछले चुनाव में बीजेडी ने 12 और बीजेपी ने नौ सीटों पर चुनाव लड़ा था.

लेकिन इस बार बीजेडी अपने सहयोगी को पाँच से ज़्यादा सीटें देने को तैयार नहीं थी.

अब तक दोनों दलों के बीच 4:3 यानी चार अनुपात तीन के हिसाब से सीटों का बँटवारा होता रहा है. इसका मतलब है कि बीजेडी की चार सीटों पर बीजेपी को तीन सीटें.

लेकिन अब यह फ़ार्मूला बीजेडी को मंज़ूर नहीं है.

बीजेडी नेता और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि पिछले कुछ समय में बीजेडी का जनाधार बढ़ा है और बीजेपी का जनाधार कम हुआ है, ऐसे में पुराने फ़ार्मूले के आधार पर सीटों का बँटवारा संभव नहीं है.

बातचीत विफल होने के बाद नवीन पटनायक ने कहा, "यह स्पष्ट है कि अब दोनों दल इस चुनाव में अलग-अलग उतरेंगे."

हालाँकि बीजेपी विधानसभा चुनाव में कम सीटें कम किए जाने पर राज़ी थी लेकिन लोकसभा सीटों पर वह ज़्यादा समझौते के पक्ष में नहीं थी.

 
 
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