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भारत में बच्चों का वज़न औसत से कम
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भारत के ग्रामीण इलाक़ों में तीन साल से कम उम्र के 40 प्रतिशत बच्चों का वज़न औसत से कम है जबकि 45 फ़ीसदी बच्चों का विकास सही
ढंग से नहीं हो पाया है.
ये आंकड़े एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ़) और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने पेश किए हैं. ग्रामीण भारत में खाद्य असुरक्षा की स्थिति पर पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं और बच्चों में ख़ून की कमी यानी अनीमिया के मामलों में वृद्धि हुई है. साथ ही आयोडीन, विटामिन-ए और विटामिन-बी की कमी के मामलों में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है. एमएसएसआरएफ़ के अध्यक्ष और सासंद प्रोफ़ेसर एमएस स्वामीनाथन का कहना था कि भारत के अलग-अलग राज्यों की खाद्य सुरक्षा को समझने के लिए तीन पहलुओं पर ध्यान दिया गया.
उनका कहना था कि पहला ये कि खाद्य सामग्री कितनी मौजूद है, उसकी पहुँच कितने लोगों तक है और फिर उसकी खपत कितनी है. सबसे ख़राब स्थिति अध्ययन में पाया गया कि झारखंड में खाद्य असुरक्षा की स्थिति सबसे ख़राब है. एमएस स्वामीनाथन का कहना था," झारखंड राज्य में खाद्य सुरक्षा की स्थिति काफ़ी ख़राब है. पहले उड़ीसा में सबसे बुरी स्थिति थी, लेकिन पिछले पांच सालों में वहाँ सुधार आया है." रिपोर्ट में कहा गया है कि 36 फ़ीसदी महिलाएँ और 34 प्रतिशत पुरुषों को कमज़ोरी की शिकायत है. खाद्य असुरक्षा का कारण दुनिया भर में खाद्य सामग्रियों की बढ़ती क़ीमतें और जलवायु परिवर्तन बताया गया. रिपोर्ट में कुछ साकारात्मक पहुओं का भी ज़िक्र है, जैसे सार्वजिनक वितरण प्रणाली, बच्चों के लिए स्कूल में दोपहर के खाने का प्रावधान, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी क़ानून. रिपोर्ट में कुपोषण को कम करने के अलावा इन स्कीमों को और विस्तार देने की सिफ़ारिश की गई है. रिपोर्ट ये भी सिफ़ारिश की गई है कि सरकार को अपनी आर्थिक नीतियाँ बदलनी चाहिए ताकि ग्रामीण भारत तक उसका लाभ मिल सके. |
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