गुरुवार, 04 दिसंबर, 2008 को 10:29 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में जमात उल दावा के नाम से काम कर रहे लश्कर-ए-तैबा का कहना है कि उनके अभियान भारत प्रशासित कश्मीर तक ही सीमित हैं.
बीबीसी उर्दू सेवा से बातचीत में जमात उल दावा के प्रवक्ता याहया मुजाहिद का कहना था कि जमात- उल-दावा लश्कर पर पाबंदी के पहले से काम कर रही है.
मुंबई धमाकों के बारे में पूछे जाने पर प्रवक्ता ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया.
यह पूछे जाने पर कि क्या वो इसकी भर्त्सना करते हैं, तो उनका कहना था, "जिहाद और दहशतगर्दी की तुलना नहीं की जा सकती है. जिहाद कुरान और हदीस पर आधारित है. भारत में जो भी होता है उसमें लश्कर की तरफ उँगली उठा दी जाती है जबकि साफ़ हो गया है कि इसमें लश्कर-ए-तैबा का हाथ नहीं रहता है".
यह पूछे जाने पर कि क्या वो मुंबई के हमलों को आतंकवाद या दहशतगर्दी मानते हैं तो उनका कहना था, "मैंने पहले ही आपसे कहा कि जमात-उल-दावा धार्मिक संगठन है. हमारा काम कश्मीरियों के लिए है. मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस के मामलों में भारतीय फ़ौज के लोग शामिल थे".
उल्लेखनीय है कि मुंबई में हुए हमलों में बार बार लश्कर-ए-तैबा का हाथ होने की बात कही जाती रही है.
मुंबई में हुए हमले में कम से कम 180 लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
मामले की जाँच में भारतीय अधिकारियों की मदद अमरीकी जाँच एजेंसी (एफ़बीआई) और ब्रितानी पुलिस कर रही है.
भारत ने कहा है कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि इस हमले में पाकिस्तानी तत्वों का हाथ था.
अमरीकी विदेश मंत्री कॉंडोलिज़ा राइस के दौरे के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी ने आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया है.
भारत का कहना है कि हमले में शामिल दसों चरमपंथी पाकिस्तान के कराची शहर से समुद्री रास्ते से मुंबई आए थे जिनमें से नौ मारे गए और एक जीवित पकड़े गए चरमपंथी से पूछताछ की जा रही है.