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नेपाल में मीडिया पर हुए हमलों का विरोध
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नेपाल के कई अख़बारों ने संपादकीय की जगह ख़ाली छोड़कर मीडिया पर माओवादी कार्यकर्ताओं के हमलों का विरोध किया है.
पिछले हफ़्ते क़रीब 12 माओवादी कार्यकर्ताओं ने नेपाल के एक बड़े अख़बार प्रकाशन समूह 'हिमाल' के दफ़्तर और उसके स्टाफ़ पर हमले किए थे. सोमवार को सैकड़ों पत्रकारों ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में हमले के विरोध में रैलियाँ निकाली. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नेपाली टाइम्स और अन्य पत्रिकाओं ने माओवादियों की आलोचना करते हुए लेख छापे थे.
नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड ने इन हमलों में माओवादियों की किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है. उन्होंने नेपाली मीडिया को बताया, "माओवादियों के वेश में कुछ लोग पार्टी को बदनाम करने में लगे हुए हैं. हमारी पार्टी इन लोगों से छुटकारा पाने की लगातार कोशिश कर रही है." 'स्वतंत्रता पर हमला' एक संयुक्त बयान में नेपाली मीडिया संगठन ने इन हमलों की निंदा की है और कहा है कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक कि माओवादी पार्टी प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं रोकती. बयान के मुताबिक, "यदि सत्ताधारी पार्टी से जुड़े समूहों के मीडिया पर ये हमले तुरंत नहीं रुकते हैं तो हमारी मीडिया कंपनियों का विरोध इसी तरह से आगे भी होगा." प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा है कि उन्होंने इन हमलों की जाँच के आदेश दे दिए हैं. रविवार को क़रीब 12 पूर्व माओवादी विद्रोहियों ने हिमाल मीडिया के दफ़्तर पर हमले किए थे और माँग की था कि माओवादी पार्टी से जुड़े कर्मचारियों की बहाली फिर से की जाए जिनकी छँटनी कर दी गई थी. हिमाल मीडिया का कहना है कि इन हमलों का इससे कुछ लेना-देना नहीं है बल्कि माओवादियों की मीडिया पर प्रभुत्व की यह कोशिश है. हालांकि कुछ ख़बरों के मुताबिक माओवादियों की आलोचना संबंधी खबरों की वजह से माओवादी गुस्से में थे. हिमाल मीडिया के तहत प्रकाशित होने वाले नेपाली टाइम्स के संपादक कुंदा दीक्षित कहते हैं, "यह लोकतंत्र और मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है." |
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